{"product_id":"jharna-9789350723784","title":"Jharna","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Jaishankar Prasad\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eझरना - झरना (काव्य संग्रह) के रचयिता जयशंकर प्रसाद हैं। यह पुस्तक छायावादी कविता की प्रारम्भिक पुस्तक है। छायावाद का प्रारम्भ झरना के प्रकाशन से ही माना जाता है। झरना का प्रकाशन १९१८ ई. में हुआ। इसमें अपेक्षाकृत कम कविताएँ थीं। आगामी संस्करणों में कुछ कविताएँ और रख दी गयीं तथा कुछ कविताओं को हटा दिया गया। झरना की कविताओं में कवि के आगामी विकास का आभास प्राप्त हो जाता है और इसी कारण समीक्षक इसे छायावाद युग का एक महत्त्वपूर्ण सोपान मानते हैं। झरना की अधिकांश कविताएँ १९१४-१९१७ ई० के बीच लिखी गयीं है। झरना कवि के यौवनकाल की रचना है और इसकी कविताओं से उसकी मनोदशा का बोध होता है। प्रकृति का मानवीय भावों के साथ एकीकरण भी इन कविताओं में देखा जा सकता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":46523074936983,"sku":"9789350723784","price":130.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789350723784.webp?v=1767179855","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/jharna-9789350723784","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}