{"product_id":"jhoola-nat-9788126703845","title":"Jhoola Nat","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Maitreyi Pushpa\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eगाँव की साधारण–सी औरत है शीलो—न बहुत सुन्दर और न बहुत सुघड़...लगभग अनपढ़—न उसने मनोविज्ञान पढ़ा है, न समाजशास्त्र जानती है। राजनीति और स्त्री–विमर्श की भाषा का भी उसे पता नहीं है। पति उसकी छाया से भागता है। मगर तिरस्कार, अपमान और उपेक्षा की यह मार न शीलो को कुएँ–बावड़ी की ओर धकेलती है, और न आग लगाकर छुटकारा पाने की ओर। वशीकरण के सारे तीर–तरकश टूट जाने के बाद उसके पास रह जाता है जीने का नि:शब्द संकल्प और श्रम की ताक़त एक अडिग धैर्य और स्त्री होने की जिजीविषा...उसे लगता है कि उसके हाथ की छठी अँगुली ही उसका भाग्य लिख रही है...और उसे ही बदलना होगा।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e‘झूला नट’ की शीलो हिन्दी उपन्यास के कुछ न भूले जा सकनेवाले चरित्रों में एक है। बेहद आत्मीय, पारिवारिक सहजता के साथ मैत्रेयी ने इस जटिल कहानी की नायिका शीलो और उसकी ‘स्त्री–शक्ति’ को फ़ोकस किया है–––\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपता नहीं ‘झूला नट’ शीलो की कहानी है या बालकिशन की! हाँ, अन्त तक, प्रकृति और पुरुष की यह ‘लीला’ एक अप्रत्याशित उदात्त अर्थ में ज़रूर उद्भासित होने लगती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eनिश्चय ही ‘झूला नट’ हिन्दी का एक विशिष्ट लघु उपन्यास है…।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285603311767,"sku":"9788126703845","price":207.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126703845.webp?v=1769283855","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/jhoola-nat-9788126703845","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}