{"product_id":"jiivn-ek-aannd-alknndaa-jeevan-ek-anand-alakhnanda-9789356638112","title":"जीवन एक आनन्द : अलकनंदा (Jeevan Ek Anand : Alakhnanda)","description":"\u003cp\u003e • Author(s): महेन्द्र गुप्ता (Mahender Gupta)\u003cbr\u003e • Publisher: GenNext Publication\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: GenNext Publication\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eपुस्तक के बारे में : प्रस्तुत  पुस्तक  अलकनंदा में  मानवता  और समाज के बारे  में  बताया  है  कि  किस  तरह  हम  किस  तरह  हम  एक  इंसान  बनने  रूपी  जीवन  यापन  की  गरिमा  पल-पल  पा  सकते  हैं।  यदि  पीड़ा  से  सीखकर  बेहतर  इंसान  बनने  की  प्राकृतिक  प्रक्रिया  से  मुस्कुराकर  आगे  बढ़ना  है  तो  हमें  दूसरों  की  पीड़ा  को  महसूस  कर  सकने  के  लायक  संवेदनशीलता  लाने  की  तरफ  बढ़ना होगा। यदि अपनी पीड़ा से बचना है तो दूसरों की पीड़ा यानि दर्द को समझना होगा। विनम्रता  सहिष्णुता  हमें  अपने  जीवन  में  सम्मिलित  करने  चाहिए,  हमारा  सबसे  बड़ा  शत्रु  है क्रोध।  परम  पुरुष  वही  है  जो  किसी  से  घृणा  न  करे।  हमें  जीवन  को  सार्थक  बनाने  के  लिये अपने  विवेक  का  प्रयोग  करना  चाहिये।  विभिन्न  वक्तव्य,  संक्षिप्त  लेख  उक्तियों  से  मानवता और समाज में हमें किस  तरह रहना  चाहिये, आज हम जो कुछ भी  करेंगे वही लौटकर हमारे  पास  आता  है।  माँ  की  शिक्षा  से  ही  ईश्वर  चन्द  विद्यासागर  ने  अपनी  माँ  के  तीन  वचनाे की  जगह  तीस  आभूषण  रुपी  कार्य  किये।  संसार  में  हमें  कमल  के  फूल  की  तरह  अनासक्त जीवन  जीना  चाहिये  स्टीफन  हॉकिंग  ने  कैसे  अपनी  लाइलाज  बीमारी  से  जूझकर  ये  साबित कर दिया  कि  यदि व्यक्ति  के अन्दर ज्वंलन्त इच्छा है तो वह सफलता के ऐसे मापदंड  स्थापित  करता  है।\u003c\/p\u003e","brand":"GenNext Publication","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46195189121175,"sku":"9789356638112","price":63.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789356638112.webp?v=1769300058","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/jiivn-ek-aannd-alknndaa-jeevan-ek-anand-alakhnanda-9789356638112","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}