{"product_id":"jnyaanyog-gyanyog-9788121260633","title":"ज्ञानयोग (Gyanyog)","description":"\u003cp\u003e • Author(s): स्वामी विवेकानन्द (Swami Vivekananda)\u003cbr\u003e • Publisher: Gyan Publishing House\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Gyan Publishing House\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eकिताब के बारे में प्रस्तुत पुस्तक ज्ञानयोग में दर्शाया गया है कि वैयक्तिक एवं सामुदायिक जीवन गठन में वेदान्त किस तरह सहायक होता है। मनुष्य के विचारों का उच्चतम स्तर वेदांत ही है। सांसारिक सभी विचार धाराओं का मूल स्रोत वेदांत ही है। वेदांत में मनुष्य का दैवी स्वरूप झलकता है तथा इसमें समस्त विश्व की आशा, कल्याण तथा शांति निहित है। अद्वैत वेदांत की धारणा अत्यंत कठिन है। यही ब्रह्म जगत बन जाता है देश, काल, निमित्त से वह अद्वैत हो जाता है। देश, काल, निमित्त रूपी कांच से जब हम ब्रह्म को देखते हैं तो वह जगत रूप में दिखाई देता है। वेदान्तानुसार ज्ञान योग में यही कहा गया है कि ‘‘स्वर्ग का राज्य तुम्हारे भीतर हैं’’ सिर्फ देखने-सुनने की जरूरत है। ज्ञान योग का सारांश है कि तुम्हीं समस्त जगत हो किससे घृणा करोंगे, किससे प्यार करोगे जो इस तत्व को जान गया वही ज्ञान योगी है वह अपना समस्त जीवन उसी के द्वारा गठित करता है तथा अंधकार उससे कोसों दूर रहता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Gyan Publishing House","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46194870550679,"sku":"9788121260633","price":126.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788121260633.webp?v=1769299249","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/jnyaanyog-gyanyog-9788121260633","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}