{"product_id":"kaal-kothri-9789352295272","title":"Kaal Kothri","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Swadesh Deepak\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eनाट्यात्मक कहानियों के लिए पहचाने गये स्वदेश दीपक हिन्दी में कहानी के रंगमंच की अवधारणा को विकसित करनेवाले लेखकों में से हैं । सुगठित चरित्रांकन, चुस्त संवाद और गत्यात्मक घटनाएँ उनकी रचनाओं की ख़ास विशेषताएँ हैं। रजत, मीना, अंगद, कौल, राजीव, महेन्द्र, कान्ता, बलवन्त जैसे रंगजीवी और शर्मा तथा वसुंधरा जैसे सत्ताश्रयी परजीवी इस नाटक में जो परिवेश रचते हैं उसमें कला, काल बन जाती है। अभावग्रस्त रंगमंच यहाँ काल कोठरी के रूप में उभरता है। कलाकारों की विवशता, तकलीफ़ों के बीच थियेटर को ज़िन्दा रखने का जुनून और स्वाभिमान बचाए रखने का जटिल संघर्ष समानान्तर पर्याय बनकर नाटकीय तनाव की सृष्टि करते हैं ।पद और पहुँच के बल पर साहित्य, कलाएँ, संस्कृति के नियामक संचालक बननेवाले ब्यूरोक्रेट वर्ग के कथित कवियों कला मर्मज्ञों की जड़ता अहं और राजनीति के सामने पराभूत होने की दयनीयता को व्यक्त करते हुए स्वदेश दीपक कई सच्चाइयों को निरावृत कर देते हैं।रंगकर्मी कलाकार का सामाजिक गुस्सा विरोधाभास से भरे विसंगत यथार्थ को प्रतिबिम्बित करता है। व्यंग्य के माध्यम से लेखक चोट ही नहीं करता बल्कि करुणा को भी गहराता है। यहाँ सक्रिय नाट्य पदावली काव्यभाषा के आवेग से युक्त है। अनायास अर्ध उत्तेजन इसकी विशेषता है।-हेमंत कुकरेती\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46523066646679,"sku":"9789352295272","price":98.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789352295272.webp?v=1767179796","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/kaal-kothri-9789352295272","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}