{"product_id":"kahe-latif-9789369440870","title":"Kahe Latif","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Shah Abdul Latif\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eहृदय से पहुँचो साजन तकपाँव से पैदल करना बेकारपहाड़ों में न ढूँढ़ो उसके निशानसमुइ, चाल चलो रुहानी\"सिन्धी होने का मतलब है 'शाह जो रिसालो से वाक़फ़ियत\", अनुवादक रीटा कोठारी लिखती हैं। 'रिसालो' सिन्ध के सूफ़ी सन्त-कवि शाह अब्दुल लतीफ़ (1689-1752) का दीवान है; सूफ़ी साहित्य का अमूल्य मोती है रिसालो। इसकी उपज सूफ़ी विचारधारा से हुई है, किन्तु ये सिन्ध की मिट्टी-उसकी लोक कहानियाँ, पेड़-पौधे, जंगल और जानवर-का आईना भी है। सिन्धी से हिन्दी में अनूदित, प्रस्तुत है रीटा कोठारी की क़लम व अनुभव से, रिसाले के बैतों (पद्य) का एक अनूठा संग्रह : 'कहे लतीफ़’।\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46523127300247,"sku":"9789369440870","price":267.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789369440870.webp?v=1767180161","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/kahe-latif-9789369440870","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}