{"product_id":"kala-aur-sanskriti-9789389243321","title":"Kala Aur Sanskriti","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Vasudev Sharan Agarwal\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan, Sahitya Bhawan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan, Sahitya Bhawan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eकला और संस्कृति' समय-समय पर लिखे हुए मेरे कुछ निबन्धों का संग्रह है। 'संस्कृति' मानव जीवन की प्रेरक शक्ति और राष्ट्रीय जीवन की आवश्यकता है। वह मानवी जीवन को अध्यात्म प्रेरणा प्रदान करती है। उसे बुद्धि का कुतूहल मात्र नहीं कहा जा सकता। संस्कृति के विषय में भारतीय दृष्टिकोण की इस विशेषता का प्रस्तुत लेखों में विशद वर्णन किया गया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eलोक का जो प्रत्यक्ष जीवन है, उसको जाने बिना हम मानव जीवन को पूरी तरह नहीं समझ सकते। कारण भारतीय संस्कृति में सब भूतों में व्याप्त एक अन्तर्यामी अध्यात्म तत्‍त्‍व को जानने पर अधिक बल दिया गया है। हमारी संस्कृति उन समस्त रूपों का समुदाय है जिनकी सृष्टि ही मानवीय प्रयत्नों में यहाँ की गई है। उनकी उदात्त प्रेरणाओं को लेकर ही हमें आगे बढ़ना होगा। स्थूल जीवन में संस्कृति की अभिव्यक्ति ‘कला' को जन्म देती है। कला का सम्बन्ध जीवन के मूर्त रूप से है। कला मानवीय जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है। वह कुछ व्यक्तियों के विलास साधन के लिए नहीं होती। वह शिक्षण, आनन्‍द और अध्यात्म साधना के उद्देश्‍य से आगे बढ़ती है। इसी से जहाँ जो सौन्दर्य की परम्परा बची है, उसे सहानुभूति के साथ समझ कर पुन: विकसित करना होगा। भारतीय कला न केवल रूप विधान की दृष्टि से समृद्ध है, वरन् उसकी शब्दावली भी अत्यन्त विकसित है। समय रहते कला की पारिभाषिक शब्दावली की रक्षा करना भी हमारा आवश्यक कर्त्‍तव्य है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअन्त में यह कहा जा सकता है कि पूर्व मानव के जीवन में जो महत्त्व धर्म और अध्यात्म का था, वही अपने वाले युग में कला और संस्कृति को प्राप्त होगा।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e—भूमिका से\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan, Sahitya Bhawan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285532958871,"sku":"9789389243321","price":350.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789389243321.webp?v=1769283705","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/kala-aur-sanskriti-9789389243321","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}