{"product_id":"kamayani-ka-punarmulyakan-9788180310737","title":"Kamayani Ka Punarmulyakan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ramswaroop Chaturvedi\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eप्रस्तुत कृति के माध्यम से डॉ. चतुर्वेदी ने ‘कामायनी’ के पुनर्मूल्यांकन को सही दिशा दी है। जैसा कि उन्होंने स्वयं विवेचन किया है, आकर्षण-विकर्षण, आतंक-उपेक्षा तथा महानता-विश्वविद्यालयीयता के बीच कवि ‘प्रसाद’ का अब तक विवेचन ‘भाषा और संवेदना’ की रचनात्मक उपलब्धि के केन्द्रीय सत्य को व्याख्यायित करने में असमर्थ रहा है। डॉ. चतुर्वेदी के अनुसार बिना इस पकड़ के ‘प्रसाद’ के काव्य का न सही मूल्यांकन हो सकता है और न उनके काव्य के अध्ययन के दौरान उठनेवाले सवालों का ठीक जवाब ही खोजा जा सकता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eलेखक ने बहुत सधे ढंग से ‘प्रसाद’ काव्य और मुख्यत: ‘कामायनी’ के गहरे और सूक्ष्म सांस्कृतिक सन्दर्भों को विवेचित करने की चेष्टा की है, और बिम्ब-विधान के माध्यम से उनकी रचनात्मक क्षमता को प्रतिपादित करने का प्रयास किया है। वस्तुत: काव्य रचनात्मक संश्लेष को उसकी सम्पूर्ण जटिलता में विवृत करने का सबसे दक्ष उपाय यही है। यह एक संक्षिप्त अध्ययन है, और इस कारण अध्येता पाठक अतृप्त रह जाने के कारण कुछ असन्तोष का अनुभव कर सकता है। परन्तु इसमें सन्देह नहीं कि इस असन्तोष को जिज्ञासा में रूपान्तरित करती हुई यह कृति ‘प्रसाद’ काव्य को समझने में दूर तक हमारी सहायता करती है, और साथ ही काव्य की हमारी समझ को बढ़ाती है।\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285542625431,"sku":"9788180310737","price":105.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788180310737.webp?v=1769283722","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/kamayani-ka-punarmulyakan-9788180310737","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}