{"product_id":"karam-sanyasi-krishna-9788180319570","title":"Karam Sanyasi Krishna","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Jhunni Lal Verma | Ed. Satya Mohan Verma\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eव्यासदेव प्रणीत ‘महाभारत’ ग्रन्थ में भारत के राष्ट्रीय युग-परिवर्तन का इतिहास है। वह उस दीप-स्तम्भ के समान है, जिसके प्रकाश में अतीत की चित्रावली के साथ-साथ युग-क्रान्ति के पश्चात् स्थापित होनेवाली नवीन राजसत्ता, समाज और व्यक्ति के नवीन रूप, नवीन उत्साह और नवीन आकांक्षाओं की भी झलक प्राप्त होती है। यद्यपि उस ग्रन्थ में कौरव-पांडवों के भीषण युद्ध का वर्णन है, परन्तु रचना के मूल नायक कृष्ण हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकृष्ण के जिन स्वरूपों का उक्त ग्रन्थ में उद्घाटन हुआ है, उनमें युग-पुरुष, विभूति, तत्त्वज्ञ तथा पूर्णावतार मुख्य हैं\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e यदि कृष्ण के अवतार रूप को वादग्रस्त भी मान लिया जाए तब भी उनके शेष तीन रूप ही उन्हें मानवेतर या महामानव के पद पर आसीन करने को पर्याप्त हैं\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e उनका चरित्र इतना विशाल और गूढ़ है कि उसका पूर्ण दर्शन सम्भव नहीं\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e मानवीय जीवन का कोई भी पक्ष ऐसा नहीं जो उनके क्रियात्मक रूप से अछूता बचा हो\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e प्रथम रूप में वे अपने युग के नरोत्तम, दूसरे में महामानव और तीसरे में जगद्गुरु हैं\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e इन सब कारणों से वे पूर्ण पुरुष कहे व माने जाते हैं\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e योगेश्वर कृष्ण ने जिस अध्यात्म की चर्चा की तथा जिस स्थिति को प्राप्त करना प्रगतिशील मानवी जीवन की सबसे उत्कृष्ट उपलब्धि बतलाई है, वह इस जीवन से विलग किसी अन्य क्षेत्र की गतिविधि नहीं\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e यथार्थ में गीता-प्रतिपादित अध्यात्म मानवी-जीवन का ही विषय है और उसी का अंग है\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e वह संसार के व्यवहार से सम्बन्धित है\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e वह व्यक्तिगत व सामाजिक व्यवहार शुद्धि पर अवलम्बित है\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e आसुरी वृत्ति का त्याग और सात्त्विकता का अर्जन उस मार्ग के दिशा-सूचक संकेत-चिन्ह हैं\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयह पुस्तक पश्चिम के प्रभावस्वरूप भारत में कृष्ण को लेकर प्रचलित उन धारणाओं का खंडन करती है\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eजो कृष्ण की ऐतिहासिकता और गुण-सम्पन्नता को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास करती है\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e कृष्ण के सन्दर्भ में प्रक्षेपित संशयों का निराकरण करते हुए विद्वान लेखक इस पुस्तक में कृष्ण की नितान्त आधुनिक और समीचीन व्याख्या प्रस्तुत करते हैं और अकाट्य तथा प्रखर तर्कों के आधार पर एक सम्पूर्ण कृष्ण-छवि की रचना करते हैं\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285543837847,"sku":"9788180319570","price":697.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788180319570.webp?v=1769283725","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/karam-sanyasi-krishna-9788180319570","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}