{"product_id":"karna-vastav-mein-kaun-tha-कर्ण-वास्तव-में-कौन-था-religious-hinduism-mahabharat-book-in-hindi-9789392013652","title":"Karna Vastav Mein Kaun Tha? \"कर्ण वास्तव में कौन था?\" | Religious Hinduism Mahabharat Book in Hindi","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Daji Panashikar\u003cbr\u003e • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eकर्ण की सामर्थ्ये का सही मूल्यांकन उसके सामने भीष्म ने किया है। इसमें उनकी नाराजगी या एकांगिता को ढूँढऩा निरर्थक है, न ही अर्जुन के प्रति स्नेह के कारण उन्होंने कर्ण का अपमान किया, क्योंकि कर्ण दो-तीन बार अर्जुन से पराजित हो चुका है। उस पर भी वह द्रोण-भीष्म को अपने सामने कुछ नहीं गिनता है।इस उद्दाम अभिमान ने भीष्म को कठोर बोलने के लिए विवश किया है। इसमें भी अंत: पीड़ा है कि कर्ण अब तो स्वयं को सुधार ले! इसके बाद भी जब-जब कर्ण ने वरिष्ठ सदस्यों का अपमान किया है, उस वक्त भी भीष्म ने अपना संयम नहीं छोड़ा। वस्तुत: भीष्म की आयु, युद्ध-कुशलता और ज्ञान का तो कर्ण थोड़ा विचार करता! उसने सामान्य शिष्टाचार भी नहीं रखा, अभद्रता पर उतर आया है।कर्ण-भीष्म में पहले एक बार जो चिनगारी पड़ी, वह इस समय प्रज्वलित हो उठी। उसमें नुकसान दुर्योधन और उसके मित्र कर्ण का ही हुआ है। जब अति महत्त्वाकांक्षा से राष्ट्र के नेता तमाशा करने लगें तो राष्ट्र की जिम्मेदारी तो वह कतई उठा नहीं सकते, अपने साथ राष्ट्र का सर्वनाश करते हैं। बचते हैं इतिहास के पन्नों में बिखरे उसकी क्षुद्र हरकतों के अवशेष!\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46839729586327,"sku":"9789392013652","price":210.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789392013652.webp?v=1769162488","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/karna-vastav-mein-kaun-tha-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a3-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b5-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8c%e0%a4%a8-%e0%a4%a5%e0%a4%be-religious-hinduism-mahabharat-book-in-hindi-9789392013652","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}