{"product_id":"kasturi-kundal-basei-9788126715688","title":"Kasturi Kundal Basei","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Maitreyi Pushpa\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eहर आत्मकथा एक उपन्यास है और हर उपन्यास एक आत्मकथा। दोनों के बीच सामान्य सूत्र ‘फिक्शन’ है। इसी का सहारा लेकर दोनों अपने को अपने आप की कैद से निकालकर दूसरे के रूप में सामने खड़ा कर देते हैं। यानी दोनों ही कहीं-न-कहीं सर्जनात्मक कथा-गढ़न्त हैं। इधर उपन्यास की निर्वैयक्तिकता और आत्मकथा की वैयक्तिकता मिलकर उपन्यासों का नया शिल्प रच रही हैं। आत्मकथाएँ व्यक्ति की स्फुटित चेतना का जायजा होती हैं, जबकि उपन्यास व्यवस्था से मुक्ति-संघर्ष की व्यक्तिगत कथाएँ। आत्मकथा पाए हुए विचार की या ‘सत्य के प्रयोग’ की सूची है और उपन्यास विचार का विस्तार और अन्वेषण।\u003cbr\u003eजो तत्त्व किसी आत्मकथा को श्रेष्ठ बनाता है वह है उन अन्तरंग और लगभग अनछुए अकथनीय प्रसंगों का अन्वेषण और स्वीकृति जो व्यक्ति की कहानी को विश्वसनीय और आत्मीय बनाते हैं। हिन्दी में जो गिनी-चुनी आत्मकथाएँ हैं, उनमें एक-आध को छोड़ दें तो ऐसी कोई नहीं है जिसकी तुलना मराठी या उर्दू की आत्मकथाओं से भी की जा सके। इन्हें पढ़ते हुए कबीर की उक्ति ‘सीस उतारै भूंई धरै’ की याद आती है। यह साहसिक तत्त्व कस्तूरी कुण्डल बसै में पहली बार दिखाई देता है।\u003cbr\u003eचाक, इदन्नमम और अल्मा कबूतरी जैसे उपन्यासों की बहुपठित लेखिका मैत्रेयी पुष्पा की इस औपन्यासिक आत्मकथा ने हिन्दी के आत्मकथात्मक लेखन को एक नई दिशा और तेवर दिया है।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285563007127,"sku":"9788126715688","price":279.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126715688.webp?v=1769283759","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/kasturi-kundal-basei-9788126715688","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}