{"product_id":"khadoos-9789373481470","title":"Khadoos","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ashok Mishra\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eव्यंग्य और हास्य को हथियार बना के इन्सानी दुखों से निपटना नाटककार अशोक मिश्रा की ख़ासियत है। उनके लेखन में सिनेमा जैसी दृश्यात्मकता और शायराना अन्दाज़ है। मुश्किल परिस्थितियों और जटिल मनोवैज्ञानिक हलचलों को सरल-सहज ढंग से आम जन तक पहुँचा देने में नाटककार की मास्टरी नज़र आती है। नाटककार को रंगमंच का दीर्घकालीन अनुभव है इसलिए वो मंचन की व्यावहारिकता को समझते हैं। नाटक में ज़्यादा तामझाम नहीं है। प्रकाश व्यवस्था के कल्पनाशील प्रयोग से वो अन्दर-बाहर का संसार रचते हैं । कहानी एक घर से, दूसरे के घर चुटकियों में पहुँच जाती है। फ़्लैश बैक का सिनेमेटिक उपयोग नाटक के कथ्य को विस्तार देते हुए एकरस होने से बचाता है। खड़ूस के कथ्य, शिल्प और भाषा में नवीनता है। चरित्रों में व्याकुलता और उनकी बातचीत में चुटिलता है। इतना यथार्थवादी लेखन कि लगता है आप नाटक नहीं बल्कि कुछ लोगों के घर में घुस कर उनकी ज़िन्दगी से रूबरू हो रहे हैं। अम्मी का पहाड़ जैसा दुःख, सलमा की लाचारी, मुस्कान की बेबसी से उपजी विरोध की ताक़त, क़ुर्बान की आवारगी, अरमान की मोहब्बत–सब घुल-मिल कर एक ऐसी ऊबड़-खाबड़ दुनिया रचते हैं जिसमें दर्शकों को लोटपोट करने और कई मसलों पर एक गम्भीर विमर्श शुरू करने का सामर्थ्य है। अम्मी, सलमा और मुस्कान हालातों से लड़ने वाली औरतों की सुन्दर मिसाल बन पड़े हैं। नाटक का दब्बू-सा नायक अरमान अपने फ़ैसलों की वजह से अन्ततः एक सशक्त चरित्र बन कर उभरता है। निश्चित ही खड़ूस अपार सम्भावनाओं से भरा-पूरा, बेहद मनोरंजक और एक नये मिज़ाज का नाटक है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47140276207767,"sku":"9789373481470","price":210.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789373481470.webp?v=1773141445","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/khadoos-9789373481470","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}