{"product_id":"kharidi-kaudiyon-ke-mol-9788180312793","title":"Kharidi Kaudiyon Ke Mol","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Bimal Mitra\u003cbr\u003e • Publisher: LokBharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: LokBharti Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: Ancient, Classical \u0026amp; Medieval\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eखरीदी कौडिय़ों के मोलÓ बंगला का वृहत्तम और अन्यतम उपन्यास है। दीपंकर इस उपन्यास का नायक है : राष्ट्रीय और सामाजिक बवंडर में फँसी मानवता और युग-यंत्रणा का प्रतिनिधि। उसके अघोर नाना ने कहा था कि कौडिय़ों से सब कुछ खरीदा जा सकता है। नाना के कथन का सबूत मिस्टर घोषाल, मिस्टर पालित, नयनरंजिनी, छिटे, फोटा, लक्ष्मी दी आदि ने देना चाहा, परंतु दीपंकर का आदर्शबोध उनके मतवाद से टकराकर रह गया। दीपंकर के जीवन ने प्रमाण दिया कि पैसे से सुख नहीं खरीदा जा सकता। फिर भी दीपंकर का जीवन ऊपर से देखने में सुखी नहीं है। मामूली क्लर्क से वह रेलवे का बहुत बड़ा ऑफिसर बना, लेकिन अंत तक उसे जीवन के जुलूस से कटकर अज्ञातवास है। इस ट्रेजेडी का कारण है कलयुग। इस युग में रामराज्य की स्थापना असम्भव है, और में रावणराज्य की स्थापना स्वाभाविक। इसीलिए इस उपन्यास का रावण, मिस्टर घोषाल, जेल से निकलकर और अधिक शक्तिशाली बन गया और आवारा फोटा खद्दर ओढ़कर कांग्रेस का बड़ा नेता फटिक बाबू। सती मानवी आकांक्षा की मूर्ति है तो उसका पति सनातन बाबू सच्चाई और आदर्श का प्रतीक। परंतु आज सच्चाई अपंग और आदर्श नपुंसक है। इसलिए सती का सर्वनाश होकर रहा। सीता का सर्वनाश वाल्मीकि नहीं टाल सके तो सती का सर्वनाश बिमल बाबू कैसे रोक पाते! बंगला का यह महान् उपन्यास हर हिंदी पाठक के लिए पठनीय है। इसके अनुवाद की विशेषता यह है कि मूल को अविकल रखा गया है और बंगला उपन्यासों के हिंदी रूपांतर में प्राय: जो अर्थ का अनर्थ होता है, उससे यह सर्वथा मुक्त है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"LokBharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":47929318342807,"sku":"9788180312793","price":1120.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788180312793.webp?v=1781763053","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/kharidi-kaudiyon-ke-mol-9788180312793","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}