{"product_id":"khwahishon-ki-dhar-se-9789347043710","title":"Khwahishon Ki Dhar Se","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Sanjay Manharan Singh\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e‘ख्वाहिशों की धार से’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e की कहानियाँ उनकी हैं जो समाज में यों दीखते हैं जैसे उनकी कोई कहानी न हो। बूढ़ा होने के अफ़सोस से भरा एक व्यक्ति जब याद करता हो कि उसका बेटा अमेरिका में है, एक स्त्री जिसकी पिंडलियों पर अनुभूत स्पर्श ओक्टावियो पाज की याद दिलाता है, एक संघर्षशील स्त्री अपने सौन्दर्य के सम्मोहन से जाग उठती है, तथा कई ऐसे विषय जो अमूमन अदीठ रह जाते हैं, संजय उन्हें अपनी कहानियों का विषय बनाते हैं।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e संजय मनहरण किस्सागोई में निपुण हैं। बारीकियों को कथ्य और फिर कला में ढालने का उनका अन्दाज़ निराला है। उनकी कहानियाँ समाज के हर वर्ग को अपना विषय बनाती हैं इसलिए वे हर वर्ग की उन खूबियों से आपका परिचय कराते चलते हैं जो अमूमन अछूते हैं। मसलन गार्ड बाबू का सारा आभिजात्य तब तक ही है जब तक नौकरानी उनसे कोई प्रश्न नहीं पूछ लेती है। उस वक्त जब वे गाली देते हैं तब पाठकों को उनके आभिजात्य की हकीकत पता चलती है। कविमना एक पात्र तब अपने ढोंग से बाहर निकलता है जब उसे एहसास होता है कि कहीं नायिका उसे जिगोलो तो नहीं समझ रही। ऐसी अनेक स्थितियों का चित्रण संजय जिस भाषा में और जिस दक्षता से करते हैं, उससे उनके बेहतरीन कथाकार रूप का पता पड़ता है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e —चन्दन पाण्डेय\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47716885430423,"sku":"9789347043710","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789347043710.webp?v=1776940566","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/khwahishon-ki-dhar-se-9789347043710","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}