{"product_id":"koi-baat-nahin-9788126728763","title":"Koi Baat Nahin","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Alka Saraogi\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e“तभी हवा का एक झोंका न जाने क्या सोचकर एक बड़े से काग़ज़ के टुकड़े को शशांक के पास ले आया। उसने घास से उठाकर उसे पढ़ा—‘आदमी का मन एक गाँव है, जिसमें वही एक अकेला नहीं रहता।’ शशांक ने सोचा, आदमी मन में ही तो अपने को और अपनी सारी बातों को छिपाकर रख सकता है...’’\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e‘कोई बात नहीं’ जैसे एक मंत्र है—हार न मानने की ज़िद और नई शुरुआतों के नाम। समय के एक ऐसे दौर में जब प्रतियोगिता जीवन का परम मूल्य है और सारे निर्णय ताक़तवर और\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसमर्थ के हाथ में हैं, वेदना, जिजीविषा और सहयोग का यह आख्यान ऐसे तमाम मूल्यों का प्रत्याख्यान है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमोटे तौर पर इसे शारीरिक रूप से कुछ अक्षम एक बेटे और उसकी माँ के प्रेम और दु:ख की\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसाझेदारी की कथा के रूप में देखा जा सकता है, पर इसका मर्म एक सुन्दर और सम्मानपूर्ण जीवन की आकांक्षा है, बल्कि इस हक़ की माँग है। शशांक सत्रह साल का एक लड़का है जो दूसरों से अलग है क्योंकि वह दूसरों की तरह चल और बोल नहीं सकता। कलकत्ता के एक नामी मिशनरी स्कूल में पढ़ते वक़्त अपनी ग़ैरबराबरी को जीते हुए, उसका साबिका उन तरह-\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eतरह की दूसरी ग़ैरबराबरियों से भी होता रहता है, जो हमारे समाज में आसपास कुलबुलाती रहती है। स्कूल में शशांक का एकमात्र दोस्त है—एक एंग्लो-इंडियन लड़का आर्थर सरकार जो उसी की तरह एक क़िस्म का जाति-बाहर या आउटकास्ट है—अलबत्ता बिलकुल अलग कारणों से।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eशशांक का जीवन चारों तरफ़ से तरह-तरह के कथा-क़िस्सों से घिरा है। एक तरफ़ उसकी आरती मौसी है, जिसकी प्रायः खेदपूर्वक वापस लौट आनेवाली कहानियों का अन्त और आरम्भ शशांक को कभी समझ में नहीं आता। दूसरी तरफ़ उसकी दादी की कहानियाँ हैं—दादी के अपने घुटन-भरे बीते जीवन की, बार-बार उन्हीं शब्दों और मुहावरों में दोहराई जाती कहानियाँ, जिनका कोई शब्द कभी अपनी जगह नहीं बदलता। लेकिन सबसे विचित्र कहानियाँ उस तक पहुँचती हैं जतीन दा के मार्फ़त, जिनसे वह बिना किसी और के जाने, हर शनिवार विक्टोरिया मेमोरियल के मैदान में मिलता है। ये सभी कहानियाँ आतंक और हिंसा के जीवन से जुड़ी कहानियाँ हैं जिनके बारे में हर बार शशांक को सन्देह होता है कि वे आत्मकथात्मक हैं, पर इस सन्देह के निराकरण का उसके पास कोई रास्ता नहीं है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eतभी शशांक के जीवन में वह भयानक घटना घटती है जिससे उसके जीवन के परखच्चे उड़ जाते हैं। ऐसे समय में यह कथा-अमृत ही है जो उसे इस आघात से उतारता है; साथ ही उसे संजीवन मिलता है उस सरल, निश्छल, अद् भुत प्रेम और सहयोग से जो सब कुछ के बावजूद दुनिया को बचाए रखता आ रहा है। और तब उसकी अपनी यह कथा, जो आरती मौसी द्वारा लिखी जा रही थी, पुनः जीवित हो उठती है—कथामृत के आस्वादन से जागी कथा।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285582635159,"sku":"9788126728763","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126728763.webp?v=1769283801","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/koi-baat-nahin-9788126728763","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}