{"product_id":"krmyog-karmyog-9788121260619","title":"कर्मयोग (Karmyog)","description":"\u003cp\u003e • Author(s): स्वामी विवेकानन्द (Swami Vivekananda)\u003cbr\u003e • Publisher: Gyan Publishing House\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Gyan Publishing House\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eकिताब के बारे में प्रस्तुत पुस्तक में कर्मयोग के बारे में विस्तार से विश्लेषण किया गया है। कर्म का हमारे चरित्र पर क्या प्रभाव पड़ता है। कर्मयोग में जो साहसिकता, शूरता है वह किसी योग में संभव नहीं। संसार चक्र में कर्म योग की बदौलत कूद पड़ना एवं अनेक संघर्षों के बावजूद लक्ष्य तक पहुंच जाना, अपने आप में एक बड़ी वीरता है। स्वार्थ की जड़िमा से दूर निःस्वार्थ कर्म पर जोर दिया गया है। संसार में रहते हुये भी ईश्वर की उपासना सबसे बड़ा कर्म है। कर्म की गाड़ी में सदैव कंधा देने के लिये तैयार रहें। क्षुद्र से क्षुद्र व्यक्ति भी कर्मयोगी बनकर सम्मान का अधिकारी हो सकता है। अच्छे कर्म करके हम अपना ही उपकार करते हैं कर्मयोग कर्म करने के रहस्य का ज्ञान है। कर्म योग हमें कर्म करने की उचित प्रणाली बताता है एवं कर्म को संगठित करने का ढंग बताता है। सबसे उत्तम कर्म वह है जो बिना धन, मान, कीर्ति अथवा अन्य किसी स्वार्थ भावना से किया जाये, तभी हम मनुष्य कहलाने के अधिकारी होंगे एवं अपनी पूर्णता का अनुभव भी तभी होगा।\u003c\/p\u003e","brand":"Gyan Publishing House","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46194869993623,"sku":"9788121260619","price":98.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788121260619.webp?v=1769299251","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/krmyog-karmyog-9788121260619","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}