{"product_id":"kuchh-din-aur-9788126728817","title":"Kuchh Din Aur","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Manzoor Ehtesham\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘कुछ दिन और’ निराशा के नहीं, आशा के भँवर में डूबते चले जाने की कहानी हैं—एक अन्धी आशा, जिसके पास न कोई तर्क है, न कोई तंत्र; बस, वह है अपने-आप में स्वायत्त\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकहानी का नायक अपनी निष्क्रियता में जड़ हुआ, उसी की उँगली थामे चलता रहता है\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e धीरे-धीरे ज़िन्दगी के ऊपर से उसकी पकड़ छीजती चली जाती है\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e और, इस पूरी प्रक्रिया को झेलती है उसकी पत्नी—कभी अपने मन पर और कभी अपने शरीर पर\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e वह एक स्थगित जीवन जीनेवाले व्यक्ति की पत्नी है\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e इस तथ्य को धीरे-धीरे एक ठोस आकार देती हुई वह एक दिन पाती है कि इस लगातार विलम्बित आशा से कहीं ज़्यादा श्रेयस्कर एक ठोस निराशा है जहाँ से कम-से-कम कोई नई शुरुआत तो की जा सकती है\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e और, वह यही निर्णय करती है\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e‘कुछ दिन और’ अत्यन्त सामान्य परिवेश में तलाश की गई एक विशिष्ट कहानी है, जिसे पढ़कर हम एकबारगी चौंक उठते हैं और देखते हैं कि हमारे आसपास बसे इन इतने शान्त और सामान्य घरों में भी तो कोई कहानी नहीं पल रही\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285694472343,"sku":"9788126728817","price":105.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126728817.webp?v=1769284088","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/kuchh-din-aur-9788126728817","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}