{"product_id":"lok-sahitya-ka-adhyayan-9788199356009","title":"Lok Sahitya Ka Adhyayan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Dr. Trilochan Pandey\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eभारतवर्ष के विश्वविद्यालयों में हिन्दी साहित्य के साथ-साथ \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003eलोक साहित्य का अध्ययन\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e और अध्यापन लोकवार्ता के बढ़ते हुए महत्त्व का द्योतक सिद्ध हो रहा है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e लोक साहित्य के पाश्चात्य और भारतीय विकाससूत्रों को स्पष्ट करते हुए मुख्यतः हिन्दी प्रदेश को आधार बनाकर उन सामाजिक स्थितियों का उल्लेख इस पुस्तक में किया है, जो लोक साहित्य का निर्माण करती हैं। विश्वास है कि लोक रचनाओं का सम्यक् विश्लेषण उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश की पृष्ठभूमि में ही कर सकना सम्भव है। लोक रचनाओं का कथ्य एवं रूपशिल्प गायकों एवं श्रोताओं की मनःस्थितियों द्वारा निर्धारित होता है। अतः लोक साहित्य का विवेचन उसके बाहर रह कर नहीं, बल्कि उसके भीतर आकर अर्थात् लोकमानस में पैठ कर करना चाहिए। इन्हीं बिन्दुओं को आधार बना कर यहाँ 'लोक' और उसके 'वार्ता साहित्य' शब्दों की व्याख्या प्रस्तुत की गई है। हिन्दी में तत्सम्बन्धी कार्य का आकलन करते हुए रचनाओं के मूल स्रोतों से पाठकों को अवगत कराना इस पुस्तक का मुख्य उद्देश्य है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e आशा है कि यह पुस्तक न केवल हिन्दी के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए बल्कि लोकसाहित्य के सामान्य पाठकों के लिए भी समान रूप से उपादेय सिद्ध होगी।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":48012945621143,"sku":"9788199356009","price":487.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788199356009.webp?v=1783938600","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/lok-sahitya-ka-adhyayan-9788199356009","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}