{"product_id":"mahabrahman-9788119028283","title":"Mahabrahman","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Trilok Nath Pandey\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eभारत के जाति-संजाल की अनूठी विवेचना करता है ‘महाब्राह्मण’। समाज के अब तक अनछुए रहे कई पहलुओं को बड़ी बेबाकी से उभारकर उनकी विडम्बनाओं और त्रासदियों पर प्रकाश डालती है इसकी कहानी।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eभारतीय समाज सदियों से जातियों-उपजातियों की चक्की में लोगों को पीसता रहा है। जाति हमारे यहाँ ऊपरी आभासी समरसता के अन्तस्तल में अनिवार्य तत्त्व के रूप में सदैव सक्रिय रहती है और लोगों के निर्णयों और प्राथमिकताओं के निर्धारण में एक बड़ी भूमिका निभाती है। यही कारण है कि लोग मजबूरी में भी अपनी जाति-पहचान से चिपके रहते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस उपन्यास का नायक मानवीयता की उदात्त डोर पकड़कर आगे बढ़ने की कोशिश करता है, किन्तु कदम-कदम पर उसे अपमान और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। व्यक्ति के शुभत्व में गहरी आस्था के सहारे नायक अपने संघर्ष की निरन्तरता बनाए रखता है, किन्तु प्राय: हर तरफ से बार-बार मिलती निराशा इसे आत्मघात की ओर धकेल देती है। उपन्यास के अन्य चरित्र मानव-जीवन की विभिन्न विचित्रताओं को चित्रित करते हैं जिससे इसका कथानक बहुआयामी और रोचक बन गया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eउपन्यास के लेखक ने वर्षों तक निरन्तर शोध और फील्ड वर्क किया है। महाब्राह्मण समाज की गहराई में जाकर लेखक ने अनगिनत इंटरव्यू लिए और अनेक ऐसी विसंगतियों को देखा-समझा जिनके बारे में आमतौर पर हम बिलकुल नहीं जानते। यह पहली कृति है, जो जाति-संरचना  के इस पक्ष को इतने अच्छे ढंग से न सिर्फ, चित्रित करती है बल्कि विश्लेषित भी करती है।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285598855319,"sku":"9788119028283","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788119028283.webp?v=1769283842","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/mahabrahman-9788119028283","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}