{"product_id":"man-aur-manushya-9780143459552","title":"Man Aur Manushya\/मन और मनुष्य","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Osho\u003cbr\u003e • Publisher: Penguin Swadesh\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Penguin Swadesh\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eगौतम बुद्ध ऐसे हैं जैसे हिमाच्छादित हिमालय। पर्वत तो और भी हैं, हिमाच्छादित पर्वत और भी हैं, पर हिमालय अतुलनीय है। उसकी कोई उपमा नहीं है। हिमालय बस हिमालय जैसा है। गौतम बुद्ध बस गौतम बुद्ध जैसे। पूरी मनुष्य-जाति के इतिहास में वैसा महिमापूर्ण नाम दूसरा नहीं। गौतम बुद्ध ने जितने हृदयों की वीणा को बजाया है, उतना किसी और ने नहीं। गौतम बुद्ध के माध्यम से जितने लोग जागे और जितने लोगों ने परम-भगवत्ता उपलब्ध की है, उतनी किसी और के माध्यम से नहीं। - ओशो बुद्ध एक ऐसे उत्तुंग शिखर हैं, जिसका आखिरी शिखर हमें दिखाई नहीं पड़ता। बस थोड़ी दूर तक हमारी आंखें जाती हैं, हमारी आंखों की सीमा है। थोड़ी दूर तक हमारी गर्दन उठती है, हमारी गर्दन के झुकने की सामर्थ्य है। और बुद्ध खोते चले जाते हैं--दूर...हिमाच्छादित शिखर हैं। बादलों के पार! उनका प्रारंभ तो दिखाई पड़ता है, उनका अंत दिखाई नहीं पड़ता। यही उनकी महिमा है। और प्रारंभ को जिन्होंने अंत समझ लिया, वे भूल में पड़ गए। प्रारंभ से शुरू करना; लेकिन जैसे-जैसे तुम शिखर पर उठने लगोगे, और आगे, और आगे दिखाई पड़ने लगा, और आगे दिखाई पड़ने लगेगा।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Penguin Swadesh","offers":[{"title":"Misc","offer_id":46122603872407,"sku":"9780143459552","price":228.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9780143459552.webp?v=1769298610","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/man-aur-manushya-9780143459552","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}