{"product_id":"manzil-9789377372477","title":"Manzil","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ali Sardar Jafri | Zahid Khan\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eअली सरदार जाफ़री एक बा-कमाल शायर होने के साथ-साथ शानदार कहानीकार भी थे। उनकी कहानियाँ अपने समय के दबे-कुचले तबक़ों की हालत को सामने लाती हैं। ‘मंज़िल’ नाम का ये कहानियों का मजमूआ आज़ादी से पहले 1938 में पहली बार छपकर सामने आया था, जिसमें इन्क़िलाबी जज़्बों के दूसरे पहलुओं के साथ वतन-परस्ती का जज़्बा भी साफ़ तौर पर देखा जा सकता है।\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e ये कहानियाँ एक ज़माने तक अली सरदार जाफ़री की शायरी और उनके दूसरे साहित्यिक कामों की शोहरत के साए तले कहीं छुप-सी गई थीं। ज़ाहिद ख़ान ने हिन्दी मे इनका तर्जुमा करके न सिर्फ़ जाफ़री साहब की अदबी हैसियत के एक अहम गोशे को रौशनी में लाने का काम किया है, बल्कि उर्दू कहानी के इतिहास में सरदार जाफ़री की अहमियत को मनवाने का रास्ता भी खोल दिया है। ये कहानियाँ ज़ुल्म और जब्र से लगातार जूझ रहे आज के समाज में भी वैसी ही प्रासंगिक हैं, जैसी क़रीब एक सदी पहले थीं।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47929317752983,"sku":"9789377372477","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789377372477.webp?v=1781763053","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/manzil-9789377372477","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}