{"product_id":"mausam-9788183618069","title":"Mausam","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Gulzar\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eसाहित्य में ‘मंज़रनामा’ एक मुकम्मिल फ़ार्म है। यह एक ऐसी विधा है जिसे पाठक बिना किसी रुकावट के रचना का मूल आस्वाद लेते हुए पढ़ सकें। लेकिन मंज़रनामा का अन्दाज़े-बयाँ अमूमन मूल रचना से अलग हो जाता है या यूँ कहें कि वह मूल रचना का इंटरप्रेटेशन हो जाता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमंज़रनामा पेश करने का एक उद्देश्य तो यह है कि पाठक इस फ़ार्म से रू-ब-रू हो सकें और दूसरा यह कि टी.वी. और सिनेमा में दिलचस्पी रखनेवाले लोग यह देख-जान सकें कि किसी कृति को किस तरह मंज़रनामे की शक्ल दी जाती है। टी.वी. की आमद से मंज़रनामों की ज़रूरत में बहुत इज़ाफ़ा हो गया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअथाह प्रेम, प्रेम के गहरे सम्मान और शुद्ध-सुच्चे भारतीय मूल्यों में रसी-पगी गुलज़ार की इस फ़िल्म को न देखा हो ऐसे बहुत कम लोग होंगे। लेकिन मंज़रनामे की शक्ल में इसे पढ़ना बिलकुल भिन्न अनुभव है। इतने कसाव और कौशल के साथ लिखी हुई पटकथाएँ निश्चित रूप से सिद्ध करती हैं कि मंज़रनामा एक स्वतंत्र साहित्यिक विधा है। बार-बार देखने लायक़ फ़िल्म की बार-बार पठनीय पुस्तकीय प्रस्तुति!\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285669503127,"sku":"9788183618069","price":210.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788183618069.webp?v=1769284022","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/mausam-9788183618069","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}