{"product_id":"meer-9789389143577","title":"Meer","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Compilation Op Sharma\u003cbr\u003e • Publisher: Manjul Publishing House\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Manjul Publishing House\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eउर्दू के सर्वकालिक महान शायरों में शुमार मीर तकी मीर, उर्दू शायरी के ख़ुदा के रूप में प्रसिद्द थे। रेख्ता यानी शुरुआती उर्दू। यह मीर की ही उर्दू थी जिसने ग़ालिब को फ़ारसी छोड़कर इसी ज़ुबान में लिखने को मजबूर किया। वैसे उस दौर के कुछ और मशहूर शायर जैसे सौदा, मज़हर, नज़ीर अकबराबादी और दर्द उर्दू में लिखने लगे थे, पर मीर का असर सबसे ज़्यादा था। सत्रहवीं और अट्ठारहवीं सदी उर्दू लेकर आई। उर्दू को डेरे की ज़ुबान कहा जाता था। ऐसा इसलिए कि अलग-अलग इलाकों के सैनिकों के जमावड़े में जो भाषाई तालमेल हुआ उससे उर्दू पैदा हुई। मीर का लिखना और उर्दू अपने पैरों पर खड़े होना लगभग एक ही समय हुआ। उर्दू मीर की उंगलियां थाम अहिस्ता-आहिस्ता अपना सफ़र तय करते हुए उनकी निगाहबानी में जवान हुई। 'मीर' की शायरी केवल ग़ज़लों तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने दर्जनों मसनवियां और मर्सिये भी लिखे हैं। उनकी ग़ज़लों को छह दीवानों में संगृहीत किया गया है जिनकी संख्या दो हज़ार से भी अधिक है। इसके अतिरिक्त उन्होंने लगभग पंद्रह हज़ार शे'र भी कहे हैं। 'मीर' की शायरी जहां एक और सीधी-सादी है, वहीं उसमें कहीं-कहीं कटुता भी दिखाई देती है। यूं तो 'मीर' की शायरी में उनके आशिक़ाना मिज़ाज के दर्शन होते हैं, परन्तु उन्होनें इसके अलावा भी बहुत-कुछ लिखा है, जिसे वर्गीकृत करना अत्यन्त कठिन ही नहीं, बल्कि 'असम्भव' कहा जा सकता है। 'मीर' का नाम आज भी बड़ी श्रद्धा से लिया जाता है और भविष्य में भी दरमियाने क़द, कमज़ोर जिस्म और गेहुएं रंग के इस शाइर को उर्दू अदब की एक रौशन मीनार के रूप में उतने ही सम्मान के साथ याद किया जाता रहेगा।\u003c\/p\u003e","brand":"Manjul Publishing House","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46849127743639,"sku":"9789389143577","price":114.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789389143577.webp?v=1769596126","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/meer-9789389143577","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}