{"product_id":"meera-9788119092727","title":"Meera","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Gulzar\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eहमारे दौर के असाधारण फ़िल्मकार और शायर गुलज़ार की फ़िल्म ‘मीरा’ की यह स्क्रिप्ट मीरा की जीवन-कथा का बयान-भर नहीं है। यह मीरा को देखने के लिए एक अलग नज़रिए का आविष्कार भी करती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eजैसा कि स्वाभाविक ही था, माध्यम की ज़रूरतों के चलते, इस पाठ में मीरा हमें कहीं ज्‍़यादा मानवीय और अपने आसपास की देहधारी इकाई के रूप में दिखाई देती हैं; लगभग दैवी व्यक्तित्व नहीं जैसा कि इतिहास के नायकों के साथ अकसर होता है, और मीरा के साथ भी हुआ।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eलेकिन मीरा के मानवीकरण में माध्यम की आवश्यकताओं के अलावा काफ़ी भूमिका ख़ुद गुलज़ार साहब की और एक रचनाकार के रूप में उनके रुझान की भी है। अपने गीतों में वे हवा, धूप और आहटों तक का मानवीकरण करते रहे हैं; फिर मीरा तो जीते-जागते इंसानों से भी कुछ ज्‍़यादा जीवित मानवी थीं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eमीरा और उनके युग का पुनराविष्कार करनेवाली फ़िल्म की स्क्रिप्ट के अलावा इस पुस्तक में गुलज़ार से उनके रचनाकर्म के बारे में यशवंत व्यास की एक लम्बी बातचीत भी है और साथ है ‘मीरा’ के निर्माण में आनेवाली मुश्किलों के बारे में गुलज़ार का एक संस्मरण, जो इस पुस्तक को और उपयोगी तथा संग्रहणीय बनाता है। सिनेमा के विद्यार्थियों और पटकथा लेखकों को भी यह पुस्तक बहुत कुछ सिखाती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003e \u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285591187607,"sku":"9788119092727","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788119092727.webp?v=1769283825","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/meera-9788119092727","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}