{"product_id":"mitata-bharat-banta-india-9788126722761","title":"Mitata Bharat Banta India","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Shashi Shekhar Tiwari\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e20वीं सदी के अन्तिम दशक में भारत की राजसत्ता द्वारा अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में उदारीकरण की नीति अपनाई गई। धीरे-धीरे बाज़ार मुक्त किया जाने लगा तथा अनेक महत्त्वपूर्ण सरकारी क्षेत्रों के निजीकरण होने लगे। इस पहल का भारतीय समाज की संरचना पर गहरा असर हुआ। उसके आधार पर ऊपरी ढाँचे में अनेक निर्णायक परिवर्तन घटित होने लगे। उसका प्रभाव राजनीति, समाज, शिक्षा, जीवन-शैली तथा अन्तरराष्ट्रीय मामलों पर सीधे दिखाई देने लगा। 21वीं सदी के पहले दशक में इस परिवर्तन को जिन लोगों ने सबसे पहले पहचानने की कोशिश की, उनमें शशि शेखर पहली क़तार में हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eउदारीकरण की आँधी में मिटते भारत और बनते इंडिया की गूँज अगर सुननी हो तो शशि शेखर की इस पुस्तक के इन लेखों को पढ़ जाइए। 2001 से 2010 के बीच उन्होंने लगभग हर हफ़्ते अपने कॉलम ‘आजकल’ में अपने समय का साप्ताहिक इतिहास दर्ज किया है। यह पुस्तक इस कॉलम के उन्हीं लेखों का संकलन है। इन लेखों के द्वारा आप शशि शेखर के नज़रिए से 21वीं सदी के पहले दशक की धड़कनों की समग्रता में महसूस कर सकेंगे। इन लेखों में समय पर बहस है। समय से शिकायत है। समय की प्रशंसा है। समय की कठोरता को जीत लेने का दम-खम है। समय के वास्तविक स्वरूप को पहचानने का तीक्ष्ण विवेक भी है।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285555110039,"sku":"9788126722761","price":420.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126722761.webp?v=1769283743","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/mitata-bharat-banta-india-9788126722761","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}