{"product_id":"mrityu-aur-hansi-9789394902152","title":"Mrityu Aur Hansi","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Pradeep Awasthi\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cstrong\u003eकिताब\u003c\/strong\u003e \u003cstrong\u003eके\u003c\/strong\u003e \u003cstrong\u003eबारे\u003c\/strong\u003e \u003cstrong\u003eमें\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपति राघव के विवाहेत्तर सम्बन्धों से व्यथित वृंदा कुछ अपने असहाय अकेलेपन और कुछ प्रतिशोध में अपने से छोटे कुणाल के प्रेम में पड़ जाती है। कुणाल जो ख़ुद अभी-अभी हुए ब्रेकअप के बाद भावनात्मक ट्रांस में है। कुछ समय बाद जब चीज़ें निर्णायक मोड़ लेने लगती हैं तब दुख का जो आत्मघाती बोध मासूम बच्चे, ख़ासतौर से राघव और वृंदा का बड़ा बेटा अंश, झेल रहे थे, पहाड़ की तरह टूटकर सबके ऊपर आ पड़ता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eएक सुसम्पादित फ़िल्म की तरह सजीव दृश्यों, संवादों और वातावरण की सूक्ष्म रेखाओं से बुना यह उपन्यास जो सबसे पहले करता है, वह प्रेम के इर्द-गिर्द लिपटे इस दुख और पीड़ा को हम तक पहुँचाना है। साथ ही हमें चेताता भी चलता है कि यह दुख हमारी नियति के साथ बँधा है, इसका उपचार नहीं है। यह हमारे होने की जद्दोजहद का हिस्सा है। बस कोशिश यह रहे कि हम उसे ईमानदारी से निबाहें; कपट, चालाकी और मौक़ापरस्ती का अवकाश न प्यार में है, न पीड़ा में।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285680611479,"sku":"9789394902152","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789394902152.webp?v=1769284051","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/mrityu-aur-hansi-9789394902152","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}