{"product_id":"nepali-kavitayen-9789389577570","title":"Nepali Kavitayen","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ed. Sarveshwardayal Saxena\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eनेपाली साहित्य या भाषा की प्राचीनतम रचना चौदहवीं शती का एक ताम्रपत्र माना जाता है। लेकिन मल्लकाल के अन्त के साथ ही नेपाली में साहित्य सर्जना होने लगी। सुवानन्द दास की पहली कविता, जिसमें पृथ्वीनारायण शाह (प्रथम नेपाल नरेश) की विजय-यात्रा इत्यादि का वर्णन है, नेपाली साहित्य की प्रथम कविता है। लेकिन नेपाली साहित्य की वास्तविक शुरुआत भानुभक्त आचार्य और उनके महाकाव्य ‘नेपाली रामायण’ से माननी चाहिए, जिसे भानुभक्त आचार्य ने जेल के अन्दर लिखा था।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस काल को हम नेपाली मानस के निराशा-युग, पराजय-काल के रूप में ले सकते हैं। अंग्रेज़ों के साथ अपमानजनक सुगौली सन्धि (1816) के समय अनेक दरबारी षड्यंत्रों की बीभत्सता चरम रूप में थी। सत्ता के लिए हर कोई दूसरे की लाश पर खड़े रहने को तत्पर था। नेपाली इतिहास के लहूलुहान पन्ने इन्हीं दिनों लिखे गए। भानुभक्त की ‘रामायण’ इसी भक्तिकाल (1853) की सर्वश्रेष्ठ उपलब्धि है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसत्ता और शास्त्रीयता के विरुद्ध भयंकर युद्ध के नायक गोपालप्रसाद रिमाल प्रथम कवि हैं जिनका प्रभाव आज तक बरकरार है। 1940 में ही महाकवि लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा भी स्वतंत्रता युद्ध में कूद गए। रिमाल और देवकोटा दो ऐसे अद्वितीय कवि हैं, वे अब हमारे मध्य नहीं रहे, जिन्होंने नेपाल को नई जागृति दी। 1950 में नेपाल में प्रजातंत्र की स्थापना हुई। 1950-60 के दशक को हम नेपाली साहित्य का अभूतपूर्व दशक कह सकते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस संग्रह में 1961 के बाद के कवियों को ही प्रस्तुत किया गया है—अपवाद के रूप में सर्वश्री गोपालप्रसाद रिमाल, लक्ष्मीप्रसाद देवकोटा और मोहन कोइराला हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसंग्रह के कवियों में दुरूहतावादी और ‘कला कला के लिए’ माननेवाले और अपने को प्रगतिशील कहनेवाले किसी वाद के समर्थक कवियों को शामिल नहीं किया गया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eनेपाली कविता में साठ के दशक के बाद जो पीढ़ी उभरी है, वह साहित्य को आदमी की व्यथा, वेदना, विसंगति, कटुता और जीवन के घिनौने यथार्थ को प्रकट करने का माध्यम स्वीकारती है और उसे आम आदमी तक ले जाना चाहती है। ऐसे सभी कवियों को इस संग्रह में शामिल करने का प्रयास किया गया है जो सौ साल बाद के पाठक के लिए नहीं लिखते बल्कि आज के पाठकों के सामने आज की संवेदना को लेकर जाना चाहते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285670289559,"sku":"9789389577570","price":140.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789389577570.webp?v=1769284026","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/nepali-kavitayen-9789389577570","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}