{"product_id":"os-ki-thapaki-9788183619417","title":"Os Ki Thapaki","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ashutosh Agnihotri\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘ओस की थपकी' साधारण भावनाओं की सरल लेकिन अहसास के स्तर पर ठहरकर पढ़ी जानेवाली कविताओं का संग्रह है। इस संग्रह में सम्मिलित कविताएँ पहली निगाह में बहुत आसान अनुभवों की नक्काशी करती नज़र आती हैं, लेकिन ध्यान से देखें तो उनके पीछे जीवन के जटिल और आवेशकारी तजुर्बों की एक लम्बी शृंखला बिंधी दिखाई देती है।\n\u003cbr\u003eकवि एक कविता में समाज के, हमारे आस-पास के परिवेश में व्याप्त दीमकों की तरफ़ ध्यान आकर्षित करते हुए कहता है कि 'अफ़सोस से देखते हैं\/कुतरी हुई किताबें\/उदास अलमारियाँ\/...मगर करें तो करें क्या\/ज़िद्दी हैं ये दीमक।' ग़ौर से नहीं देखें तो हम इसे एक सीलन-भरे कमरे का दृश्य समझकर आगे बढ़ सकते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि ये दीमकें उन ताक़तों का प्रतीक मात्र हैं जो हमारे आस-पास आजकल हर कहीं ख़ास तौर पर ज्ञान, शिक्षा और पुस्तकों के विरुद्ध अपनी कुंद दिमाग़ ज़िद को चढ़ाए बैठी हैं। इसीलिए कवि अन्त में इसके लिए एक उपचार भी सुझाता है कि ये दीमकें 'तब तक उगतीं\/और उठती रहेंगी\/जब तक खोदकर\/गहराइयों में\/जला नहीं देते\/नई अलख...।'\n\u003cbr\u003eएक ऐसी अलख जिसकी आँच में मिट्टी का कण-कण, हमारे परिवेश का एक-एक अंश गमकने लगे। नई लौ और नई ख़ुशबू इस तरह जाग्रत हों कि भविष्य में किसी भी दीमक को, किसी भी ऐसी ताक़त को उभरने का अवसर न मिले जो हमारी मानवीय जिज्ञासा को चुनौती देती हो।\n\u003cbr\u003eइसी तरह इस संग्रह की लगभग सभी कविताएँ जीवन के अतिसाधारण बिम्बों और चित्रों के माध्यम से ऐसी समस्याओं से हमारा परिचय कराती हैं जिनकी तरफ़ हमारा ध्यान अपनी दैनंदिन व्यस्तताओं की ऊहापोह में नहीं जाता है। ये कविताएँ वास्तव में हमारी उन्हीं दैनिक सामान्यताओं को कविता के असाधारण अनुभव में बदलने का भाषिक उपक्रम है।\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285546688663,"sku":"9788183619417","price":417.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788183619417.webp?v=1769283731","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/os-ki-thapaki-9788183619417","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}