{"product_id":"pachas-kavitayen-nai-sadi-ke-liye-chayan-s-h-vatsyayan-ajneya-9789350007259","title":"Pachas Kavitayen Nai Sadi Ke Liye Chayan: S.H. Vatsyayan 'Ajneya'","description":"\u003cp\u003e • Author(s): S.H. Vatsyayan 'Ajneya'\u003cbr\u003e • Publisher: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Vani Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eसंयोगवश जब मैं सोलह-सत्तरह वर्ष का था, तभी मुझे अज्ञेय की कविता पढ़ने का मौका मिला। उन दिनों गीतों की धूम थी। अज्ञेय की कविता ने नयी संवेदना से चकित कर दिया। यह भी समझ में आया कि कविता अपने आस-पास के अनुभवों से लिखी जा सकती है। यह भी ध्यान में आया कि पन्त, प्रसाद, निराला, महादेवी वर्मा, बच्चन, माखनलाल चतुर्वेदी और दिनकर से अलग काव्य-मुहावरे में भी कविता लिखी जा सकती है। अठारह उन्नीस वर्ष की उम्र से अज्ञेय की कविताओं से जो सम्बन्ध बना, वह आज तक अटूट है। अज्ञेय की कविता में जिन्दगी की छवियाँ और नयी लयों का आविष्कार निरन्तर आकृष्ट करता रहा। मैंने यह भी पाया कि अज्ञेय जैसी जीवन-विविधता अन्यत्र दुर्लभ है। अज्ञेय सजग आत्म-बोध के कवि हैं। इस आत्म-बोध में ‘सभ्यता-समीक्षा' का अपूर्व संसार है। परम्परा और आधुनिकता का एक बुनियादी सरोकार अज्ञेय में देशी रुझानों के साथ मौजूद है। यह सच है कि अज्ञेय आधुनिक भारतीय सभ्यता-संस्कृति के प्रश्नाकुल कवि हैं ।यह संचयन करते हुए अपनी रुचि के अलावा अन्य का भी ध्यान रखा गया है। कोशिश यही रही है कि अज्ञेय के समूचे काव्य-संसार की सर्जनात्मकता से अन्तरंग साक्षात्कार किया जा सके।-----------एक दिन देवदारु-वन बीच छनी हुईकिरणों के जाल में से साथ तेरे घूमा था।फेनिल प्रपात पर छाये इन्द्र-धनु की फुहार तले मोर-सा प्रमत्त-मन झूमा थाबालुका में अँकी-सी रहस्यमयी वीर-बहू पूछती है रव-हीन मखमली स्वर से :याद है क्या, ओट में बुरूँस की प्रथम बार धन मेरे, मैंने जब ओठ तेरा चूमा था ?\u003c\/p\u003e","brand":"Vani Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46523058028695,"sku":"9789350007259","price":65.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789350007259.webp?v=1767179751","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/pachas-kavitayen-nai-sadi-ke-liye-chayan-s-h-vatsyayan-ajneya-9789350007259","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}