{"product_id":"parde-ki-rani-9789377470326","title":"Parde Ki Rani","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ila Chandra Joshi\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eउसका ठाठ-बाट देखकर हॉस्टल की हर लड़की के मन में यह विश्वास जम चुका था कि वह किसी राजा की लड़की है, और आज उसने अचानक बताया कि वह अनाथ है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003eआ‌‌ख़िर कौन थी निरंजना! \u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e\u003cbr\u003e\u003cbr\u003e \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003eइलाचन्द्र जोशी\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e का यह प्र‌सिद्ध मनोवैज्ञानिक उपन्यास \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e‘पर्दे की रानी’\u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e में इसी निरंजना की कथा है जो हॉस्टल में आते ही हर किसी की जिज्ञासा का केन्द्र बन जाती है। अपने कमरे में पर्दे डालकर रहती है और अपनी हमउम्र लड़कियों की तरह पत्रिकाएँ और रोमांटिक किताबों के बजाय गहन साहित्यिक और दार्शनिक ग्रंथ पढ़ती है, जो मानती है कि दुख ही जीवन है। उपन्यास दो भागों में बँटा हुआ है। पहले भाग में निरंजना को लेकर जो प्रश्न खड़े होते हैं, दूसरे भाग में उनके उत्तर मिलते हैं जहाँ निरंजना की सम्पूर्ण कथा विस्तार से पढ़ने को मिलती है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e मालूम होता है कि वह दरअसल एक वेश्या-पुत्री है और अपनी माँ की तरह उसने भी सामर्थ्य-सम्पन्न पुरुषों से कुछ कम पीड़ा नहीं पाई है। हॉस्टल में सहेली बनी शीला भी आगे चलकर उसकी कहानी का हिस्सा बनती है जो सुशील भारतीय नारी समाज के प्र‌तिनिधि‌ के तौर पर निरंजना के स्वतंत्रचेता, निडर और आधुनिक व्यक्तित्व को और साफ़ ढंग से उभारती है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e अत्यन्त रोचक और विचारोत्तेजक उपन्यास!\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":48012944572567,"sku":"9789377470326","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789377470326.webp?v=1783938599","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/parde-ki-rani-9789377470326","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}