{"product_id":"pardesiya-novel-book-in-hindi-9789355622372","title":"Pardesiya Novel Book In Hindi","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Rita Kaushal\u003cbr\u003e • Publisher: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eजैसे मोहमाया में फँसी आत्मा बार-बार नए शरीर के माध्यम से जन्म लेती रहती है, वही हाल स्वयंसेवी संस्थान के इन संस्थापक सदस्यों का था। वे बार-बार कमेटी में वापस आते रहते थे। कभी संरक्षक बनकर तो कभी एक सदस्य का चोला धारण करके, किसी-न-किसी रूप में आते जरूर थे। अगर किसी कारणवश न आ पाते, तो किसी भटकती आत्मा की तरह यत्र-तत्र-सर्वत्र संस्था के कार्यक्रमों के माध्यम से अपने होने का अहसास कराते रहते।वे कहीं भी यह जताने से नहीं चूकते थे कि उनके कमेटी में न होने से संस्था का कितना नुकसान हो रहा है, उनके बिना सभी कुछ अस्त-व्यस्त हो रहा है। अतः अगली बार कमेटी में उनकी पुनः वापसी बहुत ही आवश्यक है; उनके इन वचनों को सुनकर गीता के चौथे अध्याय का 'यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ' याद आ जाता था। जैसे आत्मा को कोई नहीं मार सकता, वैसे ही इन संस्थानों से चिपके लोगों को कोई नहीं हटा सकता था। - इसी पुस्तक से मर्मस्पर्शी पठनीय उपन्यास। ये आपको उद्वेलित करेगा और आपकी संवेदना को स्पर्श भी।\u003c\/p\u003e","brand":"Prabhat Prakashan Pvt. Ltd.","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46839646978199,"sku":"9789355622372","price":210.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789355622372.webp?v=1769161921","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/pardesiya-novel-book-in-hindi-9789355622372","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}