{"product_id":"parinde-9789360867973","title":"Parinde","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Nirmal Verma\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eपरिन्दे निर्मल वर्मा का पहला कहानी-संग्रह है। सात कहानियों के इस संग्रह के पहले प्रकाशन (1958) के बाद जैसे हिन्दी कहानी को एक नया प्रस्थान मिला था। न सिर्फ़ इन कहानियों की भाषा के कारण, बल्कि इतिहास और समय के विशाल फलक पर मानव-नियति को समझने की एक नई दृष्टि और प्रविधि के कारण भी।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eनामवर सिंह ने ‘परिन्दे’ को नई कहानी धारा की पहली कहानी ठहराया था। उन्होंने सही ही कहा था कि हिन्दी भाषा के लिए जो काम कविता नहीं कर सकी, वह इन कहानियों के गद्य ने कर दिखाया।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eनिर्मल जी के पात्र अपने वातावरण में इतने प्राकृतिक होते हैं कि वे यथार्थवादी कही जानेवाली कहानियों के विवरण-बहुल चरित्रों से ज़्यादा वास्तविक लगने लगते हैं। अपनी व्यक्ति-सत्ता में वे इतने सजीव और सम्भव लोग हैं कि उनका वर्णन करने के लिए कथाकार की भाषा को लम्बी-लम्बी डिटेल्स देने की जरूरत नहीं पड़ती, वह बस उन्हें उनकी जगह पर आलोकित भर कर देती है, और हम देखते हैं कि ये हमारे अपने किसी हिस्से के कितने करीब हैं। वे हमारी स्मृति का हिस्सा हो जाते हैं, जैसे अपनी जिन्दगी के कुछ महीन अनुभव।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e‘परिन्दे’ में संकलित सभी कहानियों में मनुष्य की ऐतिहासिक अवस्थिति से उत्पन्न अस्तित्वगत प्रश्नों को, स्वतंत्रता और मुक्ति की उसकी आन्तरिक व्याकुलता को समग्र अभिव्यक्ति मिली है। रोज़मर्रा जीवन की परिस्थितियों और पात्रों को निर्मल वर्मा यहाँ इस तरह अंकित करते हैं कि उनके पीछे हमें मानव की जिजीविषा की सुदीर्घ यात्रा अपने तमाम प्रश्नों और सन्देहों के साथ आती दिखाई देती है। \u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285703680151,"sku":"9789360867973","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360867973.webp?v=1769284111","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/parinde-9789360867973","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}