{"product_id":"patriyan-9789387462779","title":"Patriyan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Bhishma Sahni\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eस्वातंत्र्योत्तर भारत में उभरता नया मध्यवर्ग भीष्म साहनी के कथाकार को लगातार आकर्षित करता रहा। शहरी टापुओं पर भटकते इस नए यात्री की सीमाओं और विडम्बनाओं को उन्होंने कहीं थोड़ी तुर्शी, तो कहीं गहरी हमदर्दी के साथ रेखांकित किया, और मध्यवर्ग के रूप में बसती हुई नई नागरिकता को वृहत्त मानवीय परिप्रेक्ष्य के भूत-भविष्य के सामने रखकर बार-बार जाँचा-परखा भी।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eवर्ष 1973 में प्रकाशित इस कहानी-संग्रह की चौदह कहानियों में से कई उनकी इस विशेषता की साक्षी हैं, लेकिन संग्रह की सबसे चर्चित कहानी 'अमृतसर आ गया है...’ की पृष्ठभूमि थोड़ी अलग है। आज़ादी के साथ आई विभाजन की विभीषिका यहाँ फिर अपनी तीव्रता के साथ उपस्थित है। यह कहानी बताती है कि ज़मीन का वह बँटवारा कितनी कड़वाहट के साथ लोगों के दिलों में उतरा, लेकिन फिर भी उन महीन सूत्रों को निस्तेज नहीं कर पाया जो अपनी ज़मीनों से उखड़ने के बाद भी लोगों की साँसों में बसे थे।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eशीर्षक कथा 'पटरियाँ’ एक मध्यवर्गीय युवक की कहानी है जिसके रहन-सहन को देखकर रसोइया भी उससे ठीक व्यवहार नहीं करता, लेकिन फिर जब उसका जीवन पटरी पर आने लगता है तो उसके सपने भी जुड़ाने लगते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eपठनीय, स्मरणीय, संग्रहणीय कहानियाँ।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285684314263,"sku":"9789387462779","price":123.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789387462779.webp?v=1769284063","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/patriyan-9789387462779","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}