{"product_id":"pattakhor-9788126722433","title":"Pattakhor","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Madhu Kankariya\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eस्वातंत्र्योत्तर भारतीय समाज में हमने जहाँ विकास और प्रगति की कई मंज़िलें तय की हैं, वहीं अनेक व्याधियाँ भी अर्जित की हैं। अनेक समाजार्थिक कारणों से हम ऐसी कुछ बीमारियों से घिरे हैं जिनका कोई सिरा पकड़ में नहीं आता। युवाओं में बढ़ती नशे और ड्रग्स की लत एक ऐसी ही बीमारी है। एक तरफ़ समाज की रग-रग में तनाव, घुटन, कुंठा और असन्तोष व्याप रहा है, युवाओं को हर तरफ़ अंधी और अवरुद्ध गलियाँ नज़र आ रही हैं, लगातार खुलते बाज़ार की चकाचौंध से मध्य और निम्न मध्यवर्ग का युवा स्तब्ध है। नतीजा भटकाव और विकृति। नशे के लिए व्यक्ति ख़ुद ज़िम्मेदार है, नशे के व्यापारी ज़िम्मेदार हैं या हमारी सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताएँ, कहना कठिन है। हमारे समय की सजग और सचेत लेखिका मधु कांकरिया इस उपन्यास में इन्हीं सवालों से दो-चार हो रही हैं। यह उपन्यास केवल एक कथा-भर नहीं है, बल्कि एक कथा के चौखटे में इसके ज़रिए नशे के पूरे समाजशास्त्र को समझने की कोशिश की गई है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003e \u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285653938327,"sku":"9788126722433","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126722433.webp?v=1769283982","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/pattakhor-9788126722433","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}