{"product_id":"ped-paun-soon-halai-9789360860271","title":"Ped Paun Soon Halai","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Prabhat\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eप्रभात हिन्दी के विश‌िष्ट कव‌ि हैं। लोक उनकी कव‌िताओं में शब्दों से ज़्यादा साँस की तरह आता है, जिया हुआ, जीवन देता हुआ। उनका सम्बन्ध राजस्थान के माड़ अंचल से है जहाँ गीतों की एक लम्बी मौखिक परम्परा है—गीत जोड़ने यानी रचने की भी और सैकड़ों के समूह में उन्हें गाने की भी। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e \u003c\/span\u003e\u003cspan class=\"a-text-bold\"\u003e‘‘पेड़ पौनू सूँ हालै’ \u003c\/span\u003e\u003cspan\u003e इसी परम्परा में लिखे गये उनके गीतों का संकलन है जिन्हें वे पिछले तीस साल से लिखते-सँजोते रहे हैं। गीतों का राग, धुन, विन्यास सब माड़ भाषा का है, हाँ रचना की प्रक्रिया में कुछ नई धुनें और नए विषय इनमें जरूर आ जुड़े हैं जिसका श्रेय कव‌ि की रचनात्मकता और प्रगत‌िशील मूल्यबोध को जाता है। किताब में जितने गीत हैं उतने ही चित्र भी हैं जिन्हें मह‌िलाएँ कच्चे घरों की दीवारों और आँगनों में बनाती हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e माड़ के लोक-मन और जीवन को उकेरते गीतों और कविताओं का संग्रह।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47716882645143,"sku":"9789360860271","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360860271.webp?v=1776940564","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/ped-paun-soon-halai-9789360860271","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}