{"product_id":"pinjar-prem-prakasiya-9789388211628","title":"Pinjar Prem Prakasiya","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ramanand Tiwari\u003cbr\u003e • Publisher: LokBharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: LokBharti Prakashan\u003cbr\u003e • BISAC: General\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eडॉ. रामानंद तिवारी ने कबीर पर \"पिंजर प्रेम प्रकासिया' शीर्षक से प्रबंध-काव्य रचकर असामान्य कार्य किया है। यह साधारण कार्य नहीं था। कबीर के जीवन-चिंतन और उनकी साधना को काव्य के प्रवाह में बाँध पाना साहस का काम है; जिसे रामानंद जी ने किया है। शायद यह रामानंद नाम का ही प्रभाव है; जिससे कबीर का यह ग्रंथावतार संभव हुआ। कबीर के समय धार्मिक\/सांप्रदायिक आग्रहों, आर्थिक विषमता, परिवारिक-सामाजिक रीतियों-कुरीतियों का संश्लिष्ट, किंतु प्रवहमान रूप इस काव्य में दिखलाई पड़ता है। पंक्तियों को ध्यान से देखे तो इसमें कामायनी का छेद-प्रवाह कहीं-कहीं सुनाई पड़ता है- \"झूमते हैं धरती-आकाश\/मेघ जब बरसाते हैं नीर\/स्रोत सब बनते एक प्रवाह\/देख मन होता अधिक अधीर।“ कबीर के विद्रोही जीवन-संघर्ष और आध्यात्मिक साधना का पर्यवसान जिस लोक-मंगल की साधना में किया गया है, वह आधुनिकता का संदेश है; जिसे रचनाकार ने प्रबंधत्व में समो लिया है, यह बडी बात है और रचना की सफलता है। कबीर के जीवन-चिंतन, संघर्ष को कविता में ना या गद्य में, उपन्यास में ना- कौन ज़यादा उचित है, यह एक अलग प्रश्न है। तिवारी जी ने कबीर-जीवन के भाव-पक्ष और आध्यात्मिक औदात्य को प्रधानत: दृष्टि में रखकर उसी में उनके बीहड़ पक्ष का समावेश किया है। हो सकता है, इसमें प्रबंधत्व क्षीण लगता हो; किन्तु काव्य गहन विचारों, सार्वभौमिक, सार्वदेशिक भावित काव्य-पक्तियों से भरपूर है। आधुनिक कबीर को प्रस्तुत करने का यह सार्थक प्रयास सर्वथा अभिनंदनीय है। -विश्वनाथ त्रिपाठी.\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"LokBharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":47929318899863,"sku":"9789388211628","price":420.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789388211628.webp?v=1781763052","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/pinjar-prem-prakasiya-9789388211628","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}