{"product_id":"pitra-vadh-9789388933995","title":"Pitra-Vadh","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ashutosh Bhardwaj\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan, Raza Foundation\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan, Raza Foundation\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eएक सजग रचनाकार को अक्सर यह बोध हो जाता है कि जिन पूर्वजों को वह अर्घ्य देता आया है, जिनका पितृ-ऋण वह अदा करना चाहता है, उन्होंने दरअसल उसकी चेतना को अपनी गिरफ़्त में ले रखा है। उनसे मुक्ति पाने के इस संघर्ष की परिणति एक अन्य बोध में होती है कि गुरु-वध के बग़ैर गुरु-दक्षिणा शायद असम्भव है।\n\u003cbr\u003eलेकिन किसी रचनाकार के लिए यह स्वीकार करना आसान नहीं कि उसका रचना-कर्म उसके पितामह की शव-साधना है क्योंकि यह आकांक्षा उस लेखक को असहनीय अपराध-बोध में डुबो देती है। वह पूर्वज अपने परवर्ती की आकांक्षा से अनजान नहीं है, शायद वह भी यही चाहता है। यही उसकी मुक्ति है। पहले से कहीं विराट पुनर्जन्म है। संस्कृत का श्लोक है—सर्वतो जयमिच्छेत। पुत्राच्छिष्यात्पराजयम्। सबको जीतना चाहता हूँ, लेकिन पुत्र और शिष्य से पराजय की इच्छा रखता हूँ। यहाँ पराजय का एक अर्थ और भी है। परा+जय यानि परम विजय। पुत्र और शिष्य के हाथों इसी पराजय में मेरी परम विजय निहित है।\n\u003cbr\u003eआशुतोष भारद्वाज की यह सयानी किताब टैगोर, निर्मल वर्मा, अनन्तमूर्ति, अरुंधति रॉय जैसे उपन्यासकारों और मुक्तिबोध, श्रीकान्त वर्मा और अशोक वाजपेयी की कविताओं को एकदम नयी निगाह से बरतती है। अज्ञेय और रामचन्द्र गाँधी सरीखी संज्ञाओं से अपने रचनात्मक सम्बन्ध को टटोलती हुई यह उस आत्मालोचन से जन्म लेती है जो वर्तमान परिदृश्य में दुर्लभ है। \n\u003cbr\u003eडायरी, निबन्ध, संस्मरण इत्यादि गद्य की विविध विधाओं में खुद को कहती इस किताब की एक अन्य उपलब्धि है भारतीय उपन्यास के आधुनिकता के साथ हुए संवाद पर अत्यन्त आत्मीय विमर्श। उपन्यास की स्त्री के एकान्त पर तो अंग्रेज़ी समेत किसी भी भारतीय भाषा में यह पहला आलोचना-कर्म है। सुचरिता, चन्द्री, बिट्टी और अम्मू की अव्यक्त आकांक्षाएँ इन पृष्ठों में ख़ुद को हासिल करती हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan, Raza Foundation","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285627887767,"sku":"9789388933995","price":209.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789388933995.webp?v=1769283916","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/pitra-vadh-9789388933995","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}