{"product_id":"pragatisheel-sahitya-ki-jimmedari-9788180319976","title":"Pragatisheel Sahitya Ki Jimmedari","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Markande | Ed. Durga Prasad Singh\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eहिन्दी साहित्य में मार्कण्‍डेय की पहचान मुख्यतः कहानीकार के रूप में है\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e 2-डी, मिन्टो रोड से सीधे जुड़े रहे लोग भी उन्हें एक बेहतरीन क़िस्सागो के रूप में ही याद करते हैं\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e लेकिन देश और समाज-संस्कृति की लेकर उनकी चिन्ताएँ व ज़िम्मेदारी का भाव उन्हें कहानी से निर्बन्‍ध भी करता रहता और विचार-रूप में सीधे व्यक्त हो उठता\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e यह पुस्तक मार्कण्डेय की इस पहचान को सामने लाती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस पुस्तक की अन्तर्वस्तु का फैलाव साहित्य से लेकर राजनीति की हद तक है\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e मार्कण्डेय यहाँ जिस चिन्तनधारा व इतिहासबोध को अपनाते हैं, वह आधुनिक समाज-विज्ञानों से आता तो है लेकिन अपने समाज की आन्तरिक स्थिति, ‘जन’ तथा ‘लोक’ से अन्तःक्रिया के साथ\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस पुस्तक में वैचारिक लेखों के आलावा ‘गोदान’ तथा अन्य ग्राम-उपन्यासों पर लिखे लेख तथा पुस्तक समीक्षाएँ भी शामिल हैं\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e लोक-साहित्य पर दो लेख और दो भाव-चित्र हैं जो आधुनिक और प्रगतिशील दृष्टि को ही अपना प्रस्थान-बिन्दु बनाते हैं\u003cstrong\u003e।\u003c\/strong\u003e इस पुस्तक में मार्कण्‍डेय सर्वथा भिन्न रूप में पाठकों से रू-ब-रू होते हैं। मार्कण्डेय के साहित्य-संवाद का यह संस्करण ‘प्रगतिशील साहित्य की ज़िम्मेदारी’ पर खरा उतरता है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e—भूमिका से\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285543608471,"sku":"9788180319976","price":210.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788180319976.webp?v=1769283724","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/pragatisheel-sahitya-ki-jimmedari-9788180319976","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}