{"product_id":"pratinidhi-kahaniyan-jaishankar-prasad-9789389577464","title":"Pratinidhi Kahaniyan : Jaishankar Prasad","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Jaishankar Prasad\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eमहाकवि के रूप में सुविख्यात जयशंकर प्रसाद हिन्दी नाट्य-जगत और कथा-साहित्य में भी एक विशिष्ट स्थान रखते हैं। ‘स्कंदगुप्त‘, ‘चन्द्रगुप्त’ और ‘ध्रुवस्वामिनी’ सरीखे नाटक और ‘तितली’, ‘कंकाल’ और ‘इरावती’—जैसे उपन्यास तथा ‘आकाशदीप’, ‘मधुआ’ और ‘पुरस्कार’ जैसी कहानियाँ उनके गद्य लेखन की अनुलंघ्य ऊँचाइयाँ हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयहाँ प्रसाद की प्रायः सभी चुनिन्दा कहानियाँ संकलित हैं, जिनसे गुज़रते हुए हमें न सिर्फ़ भारतीय दर्शन की सुखवादी मूल्य-मान्यताओं की अनुगूँजें सुनाई पड़ती हैं, बल्कि सामाजिक यथार्थ के अनेक अप्रिय स्तरों तक भी जाना पड़ता है। वास्तव में प्रसाद के लिए साहित्य की रचना एक सांस्कृतिक-कर्म है और भारतीय परम्परा के प्राचीन अथवा उसके सनातन मूल्यों में गहन आस्था के बावजूद वे मनुष्य की वैयक्तिक मुक्ति के आकांक्षी नहीं हैं। व्यक्ति हो या समाज, वे उसे स्वाधीन और रूढ़िमुक्त देखना चाहते हैं। यही कारण है कि इन कहानियों में ऐसे अविस्मरणीय चरित्रों का बाहुल्य है, जो स्वाधीनता और मानव-गरिमा को सर्वोपरि मानते हैं। इतिहास और संस्कृति के ऐसे अनेक मनोरम दृश्यचित्र इन कहानियों में उकेरे गए हैं, जो हमें न केवल मुग्ध कर देते हैं, बल्कि कुछ सोचने पर भी विवश करते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285596692631,"sku":"9789389577464","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789389577464.webp?v=1767668613","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/pratinidhi-kahaniyan-jaishankar-prasad-9789389577464","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}