{"product_id":"pratinidhi-kahaniyan-ramdarash-mishra-9789394902381","title":"Pratinidhi Kahaniyan : Ramdarash Mishra","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Ramdarash Mishra | Ed. Om Nishchal\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eरामदरश मिश्र की कहानियों का व्यास चौड़ा है। उनकी चिन्ताओं का छोर व्यापक है। किन्तु जिस एक बात को उन्होंने आज तक सर्वाधिक तरजीह दी है, वह है कहानियों की पठनीयता। वे प्रेमचन्द और रेणु के बाद की पीढ़ी के ग्रामीण रचनाकार हैं सो वे ग्रामीण भारत की समस्याओं को नहीं भूलते, अपने इलाके का दर्द नहीं भूलते। वहाँ का सामन्ती आचरण, दरिद्रता, गरीबी, मान-अपमान, अहं में जी रहा सवर्ण समुदाय, भूखे रहने पर विवश दलित और वंचित—सब उनकी निगाह में हैं। उनकी कहानियाँ इन सभी मुद्दों को उठाती हैं। जिस लहज़े में ‘राग दरबारी’ में श्रीलाल शुक्ल ने लिखा है, यहाँ से भारतीय देहात का महासागर शुरू होता है, वह महासागर रामदरश जी के कथा संसार में लहराता मिलता है। कितने आन्दोलन उनके सामने से होकर गुजरे, पर वे उस शोर-शराबे के बीच भी अनुभव, बोध और रूपबन्ध के स्तर पर वैविध्यपूर्ण कहानियाँ लिखते रहे और आज भी उसी त्वरा के साथ विभिन्न विधाओं को अपनी रचनात्मकता से समृद्ध कर रहे हैं। प्रतिनिधि कहानियाँ में सम्मिलित कथा संसार उनकी इसी बहुवस्तुस्पर्शिता का परिचायक है।\u003cbr\u003e—ओम निश्चल\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285624184983,"sku":"9789394902381","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789394902381.webp?v=1769283907","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/pratinidhi-kahaniyan-ramdarash-mishra-9789394902381","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}