{"product_id":"pratinidhi-kahaniyan-shivani-9789395737500","title":"Pratinidhi Kahaniyan : Shivani","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Shivani\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: RajkamalP\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eशिवानी कुशल कथाशिल्पी भी थीं, और रूढ़िभंजक भी। उनकी कहानियों में एक दुचित्ते रूढ़िवादी और पिता केन्द्रित समाज की कई विडम्बनाएँ हम साफ पढ़ सकते हैं। बेटों की उत्कट कामना, लड़की को दूसरे दर्जे का जीव मानकर उस पर तमाम तरह के अंकुश, शादी-ब्याह तय करने के चतुर छल-कपटमय दाँव-पेंच, और युवा लड़कियों के विद्रोही तेवर सबको उन्होंने भरपूर जिया भी और दर्ज भी किया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eउनमें हमको 60 से 90 तक के युग के निरन्तर बदल रहे पर पितृसत्ताक मूल्यों के पक्षधर भारतीय राज समाज की घरेलू तथा कामकाजी औरतों के जीवन की कई अनकही सचाइयों का बेबाक दर्शन होता है, जो सामान्यत: पुरुष लेखकों ने बहुत कम पकड़ा है। पकड़ा भी है तो सेक्स या मातृत्व के भावुक चित्रण तक ही सीमित होकर।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eविचार और संशय, श्रद्धा और बुद्धि के बीच पाठक को निरन्तर चलायमान रखती शिवानी की इन कहानियों में हम आज भी कथा की चौखट लाँघकर मानव जीवन की सनातनता को छू सकते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285642469527,"sku":"9789395737500","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789395737500.webp?v=1769283953","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/pratinidhi-kahaniyan-shivani-9789395737500","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}