{"product_id":"pratinidhi-kavitayen-gajanan-madhav-muktibodh-9788126704255","title":"Pratinidhi Kavitayen : Gajanan Madhav Muktibodh","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Gajanan Madhav Muktibodh | Ed. Ashok Vajpeyi\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eमुक्तिबोध की कविता अपने समय का जीवित इतिहास है : वैसे ही, जैसे अपने समय में कबीर, तुलसी और निराला की कविता। हमारे समय का यथार्थ उनकी कविता में पूरे कलात्मक सन्तुलन के साथ मौजूद है। उनकी कल्पना वर्तमान से सीधे टकराती है, जिसे हम फन्तासी की शक्ल में देखते हैं। नई कविता की पायेदार पहचान बनकर भी उनकी कविता उससे आगे निकल जाती है, क्योंकि समकालीन जीवन के हॉरर की तीव्रतम अभिव्यक्ति के बावजूद वह एक गहरे आत्मविश्वास की उपज है। चीज़ों को वे मार्क्सवादी नज़रिए से देखते हैं, इसीलिए उनकी कविताएँ सामाजिक यथार्थ के परस्पर गुम्फित तत्त्वों और उनके गतिशील यथार्थ की पहचान कराने में समर्थ हैं। वे आज की तमाम अमानवीयता\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eके विरुद्ध मनुष्य की अन्तिम विजय का भरोसा दिलाती हैं। इस संग्रह में, जिसे मुक्तिबोध और उनके साहित्यिक अवदान की गहरी पहचान रखनेवाले सुपरिचित कवि, समीक्षक \u003cbr\u003eश्री अशोक वाजपेयी ने संकलित-सम्पादित किया है, उनकी प्रायः वे सभी कविताएँ संगृहीत हैं, जिनके लिए वे बहुचर्चित हुए हैं, और जो प्रगतिशील हिन्दी कविता की पुख़्ता पहचान बनी हुई है।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285703090327,"sku":"9788126704255","price":139.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126704255.webp?v=1769284110","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/pratinidhi-kavitayen-gajanan-madhav-muktibodh-9788126704255","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}