{"product_id":"pravad-parva-9788180316739","title":"Pravad Parva","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Shrinaresh Mehta\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘प्रवाद पर्व’ में सीता के चरित्र पर धोबी द्वारा लांच्छन लगाने पर उसे दंड देने के मंत्रि-परिषद् के प्रस्ताव और पूर्व में ली गई अग्नि-परीक्षा जैसे अनुचित कार्य का औचित्य सिद्ध करने के लिए राम जिस तरह 'साधारण मनुष्य' की प्रतिष्ठा का तर्क देते हैं और सीता को राजसत्ता से जोड़ते हैं, उसे राष्ट्र-राज्य की तमाम व्याख्याओं, आपात्काल से उठनेवाले तमाम प्रश्नों, सत्ता के विरुद्ध साधारण मनुष्य की सत्ता को महत्त्व देने के तमाम तर्कों के बावजूद आधुनिक नहीं कहा जा सकता। यहाँ तक तो ठीक है कि सीता पर उँगली उठाना राजद्रोह नहीं है और राम के इस प्रश्न का कि 'क्या मैं या सीता राष्ट्र है?' निश्चित ही उत्तर नकारात्मक होगा। ‘प्रवाद पर्व’ की आधुनिकता वास्तव में मूल कथा की परिणति और (राम के) चरित्र की महत्ता से आक्रान्त है।\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285555863703,"sku":"9788180316739","price":88.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788180316739.webp?v=1769283743","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/pravad-parva-9788180316739","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}