{"product_id":"premchand-ki-virasat-aur-godan-9788180316111","title":"Premchand Ki Virasat Aur Godan","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Shivkumar Mishra\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘गोदान’ मूलत: ग्राम-केन्द्रित उपन्यास है और उसी रूप में मान्य भी है। ‘गोदान’ में\u003cbr\u003eग्राम और नगर की इन दुहरी कथाओं को लेकर उसके रचना-काल से तरह-तरह के सवाल और विवाद\u003cbr\u003eउठाए गए हैं तथा दोनों के समुचित संयोजन पर भी प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं। उपन्यास में गाँव की\u003cbr\u003eकथावस्तु के साथ नगर की कथा को जोड़ने में प्रेमचन्द का उद्देश्य क्या था, और दोनों के संयोजन\u003cbr\u003eमें वे कहाँ तक अपने संवेदनात्मक उद्देश्य को पूरा कर सके।\u003cbr\u003e‘गोदान’, हिन्दी कथा-साहित्य को प्रेमचन्द की बहुत महत्त्वपूर्ण देन है। उसे साहित्य के क्षेत्र में एक\u003cbr\u003e‘क्लासिक’ का स्थान मिला है। अपने गहन संवेदनात्मक गुण और अपने निहायत सादे किन्तु\u003cbr\u003eअतिशय प्रभावशाली रचना-शिल्प के नाते उपन्यास के भावी विकास को मानक के तौर पर स्वीकार\u003cbr\u003eकिया गया है। उपन्यास के परवर्ती विकास में उसकी छाप और उसके प्रतिचित्र आसानी से देखे और\u003cbr\u003eपरखे जा सकते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285555601559,"sku":"9788180316111","price":137.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788180316111.webp?v=1769283746","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/premchand-ki-virasat-aur-godan-9788180316111","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}