{"product_id":"raajyog-rajyog-9788121260596","title":"राजयोग (Rajyog)","description":"\u003cp\u003e • Author(s): स्वामी विवेकानन्द (Swami Vivekananda)\u003cbr\u003e • Publisher: Gyan Publishing House\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Gyan Publishing House\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eकिताब के बारे में प्रत्येक व्यक्ति में अनन्त ज्ञान और शक्ति का वास है। राजयोग उन्हें जाग्रत करने का मार्ग प्रशस्त करता है। राजयोग का एकमात्र उद्देश्य है मनुष्य के मन को एकाग्र कर उसे ‘समाधि’ नामक पूर्ण एकाग्रता की अवस्था में पहुँचा देना, राजयोग के विभिन्न सोपान हैं -ः यम, अर्थात अहिंसा नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि। राजा जनक भी राजयोगी थे। राजयोग का अर्थ हैसंासारिक वस्तुओं के साथ योग। राजयोग किसी धर्म विशेष पर आधारित नहीं है। प्रत्येक मनुष्य में धर्मतत्व का अनुसंधान करने की शक्ति है। मन की समस्त शक्तियों को एकत्रित करके मन पर ही उसका प्रयोग करना है। एकाग्रमन हमें विश्वास की सच्ची बुनियाद तक पहुंचा देगा। सभी कुछ हमारे ज्ञानचक्षुओं के सामने उद्भासित हो जायेगा। राजयोग हमें इसी शिक्षा की ओर अग्रसर करता है।\u003c\/p\u003e","brand":"Gyan Publishing House","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46194870026391,"sku":"9788121260596","price":126.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788121260596.webp?v=1769299252","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/raajyog-rajyog-9788121260596","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}