{"product_id":"raat-chor-aur-chand-9788180318580","title":"Raat Chor Aur Chand","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Balwant Singh\u003cbr\u003e • Publisher: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Lokbharti Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eपालीसिंह बहुत सालों बाद अपने गाँव लौटा है। लारी से उतरकर पाँच कोस चलकर गाँव पहुँचता है। जहाँ बचपन की उसकी सारी यादें—रास्ते, पेड़ों, पगडंडियों, हर कोने-कोने में छाई हुई है। बचपन की यादें एक छोटे बच्चे की उत्सुकता-भरी निगाहों की तरह उसके अन्दर उन लोगों के बारे में जानने की इच्छा पैदा कर देती हैं जिन्हें वो सालों पहले छोड़कर महानगर कलकत्ता भाग गया था। जैसे-जैसे वह गाँव की तरफ़ बढ़ता, वैसे ही हवाओं की मस्ती उसे पुरानी यादों से मदमस्त करती जाती और फिर उसे याद आती है अपनी सरनो की जिसे बचपन में वह बहुत तंग किया करता था।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eबलवन्त सिंह का यह उपन्यास अतीत की ललक को बख़ूबी उभारता हुआ आहिस्ते से इस बात का भी अहसास कराता चलता है कि वर्तमान अक्सर वैसा नहीं होता, जैसा हम सोचते हैं। समय अक्सर अपने दाँवपेच बदलता रहता है और इसी दाँवपेच के बीच कैसा है पालीसिंह, जो अपने अतीत को पूरी तरह छोड़ नहीं पाता। पालीसिंह सरनो से प्यार करता है और उसे पाने के लिए वह अपने आप को हर पल बदलने की कोशिश भी करता है। पालीसिंह ने पहली बार अपने जीवन में प्रेम को महसूस किया है पर इनसानी फ़ितरत और नियत को कभी-कभी ख़ुद इनसान भी समझ नहीं पाता है। लेकिन बलवन्त सिंह ने अपने सरल और सीधे अन्दाज़ में इस जटिलता को पाठकों के सामने पेश किया है।\u003c\/p\u003e","brand":"Lokbharti Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285546918039,"sku":"9788180318580","price":350.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788180318580.webp?v=1767668596","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/raat-chor-aur-chand-9788180318580","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}