{"product_id":"raat-ke-gyarah-baje-9788183616690","title":"Raat Ke Gyarah Baje","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Rajesh Maheshwari\u003cbr\u003e • Publisher: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Radhakrishna Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e‘रात के ग्यारह बजे’ नारी के विविध रूपों को काले और सफ़ेद खानों में रखकर देखने के बजाय ‘ग्रे एरिया’ में अलग-अलग शेड्स दिखाता है। बहुत ही विश्वसनीय प्रसंगों के ताने-बाने में। राजेश माहेश्वरी के इस उपन्यास की स्त्रियाँ शिक्षित हैं और आत्मविश्वास से भरी हुई हैं। कठिनाइयों के अथाह दुर्गम को पार कर वे अस्तित्व के संघर्ष में निरन्तर आगे बढ़ती हुई नज़र आती हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eउपन्यास के किरदार मानसी, राकेश, आनन्द, गौरव और पल्लवी के बीच रिश्तों की परतें बहुत उलझी हुई हैं। ये सभी किरदार ज़िन्दगी की गाड़ी में सवार सहयात्री से लगते हैं जिनके जीवन की घटनाएँ कहीं न कहीं हमारे अपने जीवन की सच्चाई से हमें अवगत कराते हुए प्रतीत होते हैं। 'विश्वास’ का वास्तविक अर्थ हम तब समझ पाते हैं जब हमारे साथ विश्वासघात होता है। और तभी पता चलता है कि विश्वास का धागा जितना सच्चा होता है, उतना ही कच्चा भी होता है। लेखक ने इस अनुभव को बहुत कारगर ढंग से चित्रित किया है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस उपन्यास को पढ़ते हुए एक बात अलग से ध्यान खींचती है कि स्त्री-स्वतंत्रता और स्वावलम्बन के समर्थक पुरुष उनके हित में चाहे जो करते हों, लेकिन उनके हँसी-मज़ाक़ में भी उसी तरह की बातें होती हैं जो किसी सामान्य पुरुष के। उपन्यास की भाषा कथा-प्रवाह को गतिशील बनाए रखनेवाली है तथा कथानक की बुनावट ऐसी कि लगे, जैसे कोई फ़िल्म देख रहे हों!\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eआज के दौर में स्त्री और पुरुष के बीच के रिश्तों को समझने के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपन्यास।\u003c\/p\u003e","brand":"Radhakrishna Prakashan","offers":[{"title":"Hardcover","offer_id":45285553733783,"sku":"9788183616690","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":false}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788183616690.webp?v=1767668600","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/raat-ke-gyarah-baje-9788183616690","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}