{"product_id":"rachna-ka-garbhgriha-9789394902886","title":"Rachna Ka Garbhgriha","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Krishna Sobti | Ed. R. ChetanKranti\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003eकृष्णा सोबती का हर क्षण सामान्यत: लेखक का ही क्षण होता था; लेखक होने को उन्होंने जीने की एक शैली के रूप में विकसित किया। लेकिन रचना के आत्यंतिक क्षण की अनायासता और उसके रहस्य को उन्होंने कभी भंग नहीं होने दिया। उस अनुभव की सम्पूर्णता उनके लिए एक बड़ी चीज़ थी। उस कौंध की आभा को जिससे रचना की पहली पंक्ति फूटती है, उन्होंने किसी ऐहिक उतावलेपन का शिकार नहीं होने दिया।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइसीलिए उनकी हर कृति एक घटना की तरह प्रकट हुई। साहित्य समाज के लिए भी, और ख़ुद उनके लिए भी।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eइस किताब में उनकी वे टीपें ली गई हैं जो उन्होंने अपनी कुछ कृतियों की रचना-प्रक्रिया के तौर पर लिखी थीं। लेखन तथा रचनात्मकता के विषय में उनके ऐसे आलेख भी इसमें शामिल हैं, जो उनकी अपनी रचना-प्रक्रिया के साथ-साथ लेखकीय अस्मिता सम्बन्धी उनकी धारणाओं पर भी प्रकाश डालते हैं।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eनई पीढ़ी के लेखकों के लिए अपनी एक महत्त्वपूर्ण पूर्वज के रचना-कक्ष की यह यात्रा नि:सन्देह उपयोगी सिद्ध होगी है।\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285610487959,"sku":"9789394902886","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789394902886.webp?v=1769283869","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/rachna-ka-garbhgriha-9789394902886","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}