{"product_id":"rag-darbari-9788126713967","title":"Rag Darbari","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Shrilal Shukla\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003c\/p\u003e\u003cdiv data-content-type=\"html\" data-appearance=\"default\" data-element=\"main\"\u003e\n\u003cp\u003e\u003cstrong\u003e‘\u003c\/strong\u003eराग दरबारी’ एक ऐसा उपन्यास है जो गाँव की कथा के माध्यम से आधुनिक भारतीय जीवन की मूल्यहीनता को सहजता और निर्ममता से अनावृत्त करता है। शुरू से आख़िर तक इतने निस्संग और सोद्देश्य व्यंग्य के साथ लिखा गया हिन्दी का शायद यह पहला बृहत् उपन्यास है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eफिर भी ‘राग दरबारी’ व्यंग्य-कथा नहीं है। इसका सम्बन्ध एक बड़े नगर से कुछ दूर बसे हुए गाँव की ज़िन्दगी से है, जो इतने वर्षों की प्रगति और विकास के नारों के बावजूद निहित स्वार्थों और अनेक अवांछनीय तत्त्वों के सामने घिसट रही है। यह उसी ज़िन्दगी का दस्तावेज़ है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003e1968 में ‘राग दरबारी’ का प्रकाशन एक महत्त्वपूर्ण साहित्यिक घटना थी। 1971 में इसे ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया और 1986 में एक दूरदर्शन-धारावाहिक के रूप में इसे लाखों दर्शकों की सराहना प्राप्त हुई।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eवस्तुतः ‘राग दरबारी’ हिन्दी के कुछ कालजयी उपन्यासों में से एक है।\u003c\/p\u003e\n\u003c\/div\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":45285705842839,"sku":"9788126713967","price":349.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9788126713967.webp?v=1769284119","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/rag-darbari-9788126713967","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}