{"product_id":"rasyatra-meri-sangeet-yatra-9789360861452","title":"Rasyatra: Meri Sangeet Yatra","description":"\u003cp\u003e • Author(s): Pt. Mallikarjun Mansur | Mrityunjay\u003cbr\u003e • Publisher: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e • Publisher Imprint: Rajkamal Prakashan\u003cbr\u003e\u003c\/p\u003e\u003cp\u003e\u003cspan\u003eजिस महान गायक को ‘जयपुर-अतरौली घराने का सरताज’, ‘शुद्ध संगीत का आख़िली पुरोधा’ और इसके अलावा भी बहुत कुछ कहा जाता था, ‘रसयात्रा’ उन्हीं पं. मल्लिकार्जुन मंसूर की आत्मकथा है। ऐसा लगता है कि वे सिर्फ़ गाने के लिए ही पैदा हुए थे। महज़ दस साल की छोटी उम्र से लेकर 82 साल की उम्र तक, अपने जीवन के आख़िरी दिनों तक उन्होंने गाया। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e उनका जन्म धारवाड़ के पास मंसूर नाम के एक छोटे से गाँव में हुआ। संगीत की शिक्षा उन्होंने दो प्रमुख घरानों—ग्वालियर और जयपुर-अतरौली में प्राप्त की। उनकी गायकी इसीलिए अनोख़ी थी कि उन्होंने इन दोनों घरानों को सफलतापूर्वक मिलाया और अपनी एक अलग पहचान बनाई। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e उनकी गायकी के पीछे सिर्फ़ इन दो घरानों की दो प्रणालियाँ ही नहीं, बल्कि उनके तीन गुरुओं—ग्वालियर घराने के पं. नीलकंठ बुआ अलुरमठ, उस्ताद मंज़ी ख़ान और जयपुर-अतरौली घराने के उस्ताद बुर्जी ख़ान की वैचारिक शैलियाँ भी थीं। वह अप्रचलित रागों का भंडार थे, जिन्हें उन्होंने अपनी कई महफ़िलों में पेश किया जिससे सैकड़ों श्रोताओं को अविस्मरणीय आनन्द मिला, जो आज भी उनके प्रदर्शन को याद करते हैं। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e अपने कई चाहने वालों के आग्रह पर उन्होंने 1980 में अपनी संगीत-यात्रा को दर्ज किया और इसे ‘रसयात्रा’ नाम दिया। इस पुस्तक को 1984 में कन्नड़ भाषा की ‘बेस्ट बुक’ के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। उनके बेटे, पं. राजशेखर मंसूर ने अपनी छात्रा डॉ. चन्द्रिका कामथ के साथ मिलकर इसका अंग्रेज़ी में अनुवाद किया और अब यह हिन्दी में आपके सामने है। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e यह एक ऐसे इनसान की दिल छू लेने वाली कहानी है जिसे सच में जीनियस कहा जा सकता है, फिर भी वह हमेशा एक निराडम्बर और सामान्य व्यक्ति के रूप में ही रहे। वे ख़ुद को संगीत में कुछ बड़ा हासिल करने वाला नहीं बल्कि सुर और लय का एक सच्चा ‘साधक’ मानते थे। \u003cbr\u003e\u003cbr\u003e यह हमारे देश के संगीत-इतिहास का एक ज़रूरी और अनोखा दस्तावेज़ है।\u003c\/span\u003e\u003c\/p\u003e","brand":"Rajkamal Prakashan","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":47716884381847,"sku":"9789360861452","price":175.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0666\/3471\/1191\/files\/9789360861452.webp?v=1776940567","url":"https:\/\/atlanticbooks.com\/products\/rasyatra-meri-sangeet-yatra-9789360861452","provider":"Atlantic Books","version":"1.0","type":"link"}